Thursday, September 2, 2021

गलती विभाग व आयोग की और 77 शिक्षकों भटक रहे तैनाती के लिए

 
गलती विभाग व आयोग की और 77 शिक्षकों भटक रहे तैनाती के लिए

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इनकी तैनाती के लिए रिक्त पदों को अधियाचित करने की मांग


शिक्षक भर्ती के लिए 2016 में आवेदन किया, तैनाती भी मिली लेकिन 2021 में भी नौकरी का सुख नहीं

विशेष संवाददाता--राज्य मुख्यालय

शिक्षक भर्ती के लिए 2016 में आवेदन किया, तैनाती भी मिली लेकिन 2021 में भी नौकरी का सुख नहीं। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग और माध्यमिक शिक्षा विभाग की गलतियों की सजा ये चयनित भुगत रहे हैं। आयोग से चयनित 77 शिक्षकों व प्रवक्ताओं को अभी तक पढ़ाने का मौका नहीं मिला। अब आयोग ने शासन को पत्र लिख कर अनुरोध किया है कि इन शिक्षकों को समायोजित करने के लिए रिक्त पद अधिसूचित करने का कष्ट करें।

दरअसल ये शिक्षक जब तैनाती वाले स्कूलों में पहुंचे तो पता चला कि कहीं तदर्थ शिक्षक पढ़ा रहे हैं, कहीं पदोन्नति के कारण पद भर गए तो कहीं जनशक्ति निर्धारण में पद खत्म हो गया है तो कहीं अल्पसंख्यक संस्था में तैनाती दी गई है। इन शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण करवाने में जिला विद्यालय निरीक्षकों ने असमर्थता व्यक्त की है। वहीं आयोग ने पत्र में लिखा है कि बोर्ड में उपलब्ध रिक्तियों के लिए विज्ञापन मार्च-2021 में हो चुका है, लिहाजा आयोग के स्तर पर अब इन शिक्षकों को तैनाती दिया जाना संभव नहीं है।


आयोग ने कहा है कि विभाग डीआईओएस को निर्देश दे कि वे इन पद, विषय, वर्ग, श्रेणी के अनुसार अन्य जिलों में रिक्तियां अधिसूचित करें ताकि इन्हें तैनाती दी जा सके। नियमानुसार यदि आयोग द्वारा चयनित शिक्षकों को किसी कारण तैनाती न मिल पाए तो डीआईओएस अधियाचन के लिए भेजी गई रिक्तियों के सापेक्ष तैनाती का प्रस्ताव भेज सकते हैं लेकिन इस मामले में यह संभव नहीं है क्योंकि आयोग विज्ञापन निकाल चुका है। तैनाती न पाने वालों में 54 शिक्षक और 23 प्रवक्ता शामिल हैं।

अधियाचित पदों पर पदोन्नति नहीं हो सकती

उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री आरपी मिश्र का कहना है कि अधियाचित पदों पर न तो पदोन्नति हो सकती है और न ही उसे खत्म किया जा सकता है। यह विभाग की लापरवाही है। वहीं यदि इस बीच अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किया गया तो इसकी सूचना विभाग को तुरंत आयोग को देनी चाहिए। उनका कहना है कि लिखित में भले ही कई कारण दिख रहे हों लेकिन इनमें कई जगह देखने में आता है कि सुविधा शुल्क न देने पर प्रबंध तंत्र ज्वाइनिंग देने में अड़ंगे लगाते हैं। विभाग को तुरंत अपने स्तर से इस मामले की जांच करनी चाहिए।