Tuesday, August 17, 2021

केंद्रीय विश्वविद्यालय भर्ती बोर्ड की स्थापना के लिये विधेयक जल्द लाए सरकार: संसद समिति

 

केंद्रीय विश्वविद्यालय भर्ती बोर्ड की स्थापना के लिये विधेयक जल्द लाए सरकार: संसद समिति






केंद्रीय विश्वविद्यालयों में काफी संख्या में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की जरूरत पर बल देते हुए संसद की एक समिति ने सरकार से केंद्रीय विश्वविद्यालय भर्ती बोर्ड की स्थापना के लिये प्रस्तावित विधेयक को जल्द से जल्द संसद में लाने को कहा है। शिक्षा मंत्रालय की अनुदान की मांगों 2021-22 से संबंधित समिति के 342वें प्रतिवेदन की सिफारिशों के संबंध में सरकार द्वारा की गई कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यह रिपोर्ट संसद के मानसून सत्र में पेश की गई थी । 
       
रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के प्रशासन के लिये एक मसौदा विधेयक तैयार करने के लिये अप्रैल 2013 में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा एक समिति का गठन किया गया था । 
     
इस समिति के विचारार्थ विषयों में केंद्रीय विश्वविद्यालयों एवं केंद्रीय शिक्षण संस्थाओं की स्वायत्ता को ध्यान में रखते हुए 'सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रशासन के लिये एक मसौदा विधेयक तैयार करना था । इसमें कहा गया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी का महत्वपूर्ण मुद्दा समिति के ध्यान में लाया गया । 
     
सरकार ने की गई कार्रवाई में बताया, ''शिक्षण संस्था समिति का विचार था कि शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिये वर्तमान तंत्र प्रभावी नहीं है और इसके कारण कई हजार रिक्तियां जमा हो गई हैं। अत: शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के लिये एक नया तंत्र तैयार करने की जरूरत है।''
     
मंत्रालय द्वारा गठित शिक्षण संस्था समिति ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिये विभिन्न मॉडलों पर विचार किया और एक मसौदा विधेयक प्रस्तावित किया । मसौदा विधेयक में कहा गया है कि एक केंद्रीय निकाय होगा जिसे केंद्रीय विश्वविद्यालय, पंजीयक एवं वित्त अधिकारी भर्ती बोर्ड कहा जायेगा और इसका गठन केंद्र सरकार द्वारा किया जायेगा । 
     
उच्च शिक्षा विभाग ने संसदीय समिति को बताया कि 'मंत्रालय द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट को अब तक स्वीकार नहीं किया गया है।
     
रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय समिति ने अपनी अतिरिक्त सिफारिशों में कहा कि वह विभाग के उत्तर से आश्वस्त नहीं है और विभाग को बताना चाहती है कि भारत में उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिये एक महत्वपूर्ण विभाग होने के कारण उच्च शिक्षा में शिक्षकों की कमी के मुद्दे से निपटने के लिये कदम उठाना चाहिए ।