Saturday, July 17, 2021

NEP 2020: सीएसजेएमयू ने जारी किया नई शिक्षा नीति का चार्टर

 

NEP 2020: सीएसजेएमयू ने जारी किया नई शिक्षा नीति का चार्टर



छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविदयालय (सीएसजेएमयू) ने सत्र 2021-22 से नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की प्रक्रिया लागू कर महाविद्यालयों को भेज दी है। नई शिक्षा नीति के इस चार्टर में विषयों से लेकर सेमेस्टर परीक्षा प्रणाली आदि को शामिल किया गया है। महाविद्यालयों में प्रवेश भी इसी नीति से होंगे। छात्रों को भी इसकी पूरी जानकारी देनी होगी।

डीन एकेडमिक्स डॉ. अंशु यादव ने स्पष्ट किया है कि स्नातक व परास्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों पर ही इसे लागू किया जाएगा। एक वर्ष की पढ़ाई पर सर्टिफिकेट, दो वर्ष का डिप्लोमा, तीन वर्ष की स्नातक डिग्री, चार वर्ष की स्नातक (शोध सहित) डिग्री, पांच वर्ष की स्नातकोत्तर डिग्री और शोध उपाधि मिलेगी। इनमें बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड, बीबीए, बीएलई, एमए, एमएससी, एमकॉम, एलएलबी, पीएचडी आदि हैं।

विषय चयन की प्रक्रिया भी बदली
प्रवेश प्रक्रिया के अन्तर्गत तीन प्रमुख विषयों का चयन करना होगा। इनमें दो प्रमुख विषय संकाय से और एक किसी अन्य संकाय से चुना जाएगा। पहले चार सेमेस्टर में एक माइनर विषय को दूसरे संकाय से चुनना अनिवार्य होगा। माइनर इलेक्टिव कोर्स किसी भी विषय का पेपर (4-5-6 क्रेडिट) होगा न कि पूर्ण विषय। माइनर इलेक्टिव पेपर का चुनाव संस्थान में विषयों के पेपर से किया जाएगा। हर विद्यार्थी प्रथम चार सेमेस्टर में कॉलेज स्तर से तय 03 क्रेडिट का एक रोजगार परक विषय का चयन करेगा।


रोजगार परक विषयों की सूची
एडवरटाइजिंग मैनेजमेंट, इंट्रोडक्शन टू एमएस ऑफिस, न्यूज रिपोर्टिंग एण्ड एडिटिंग, पॉजिटिव साइकोलॉजी एण्ड काउंसिलिंग, ऑफिस मैनेजमेंट एण्ड सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस, बेसिक्स ऑफ थ्री डी एनीमेशन, एनसीसी, एनिमल हसबेंड्री एण्ड डेयरिंग, बेसिक्स ऑफ एनी इंडियन-फॉरेन लैंग्वेज, इंडस्ट्रियल लॉ। इसके अतिरिक्त प्रत्येक सेमेस्टर में एक को-क्यूरिकुलर विषय जैसे खाद्य, पोषण एवं स्वच्छता, प्राथमिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और मानव मूल्य एवं पर्यावरण अध्ययन आदि। स्नातक के छात्र को प्रत्येक सेमेस्टर में एक सह विषय करना अनिवार्य होगा। तीसरे वर्ष में शोध योजना करनी होगी।

प्रवेश, निकास, पुनः प्रवेश
पहले दो सेमेस्टर के 46 क्रेडिट होंगे। सर्टिफिकेट के साथ छात्र की निकासी हो सकती है। चार सेमेस्टर यानी दो वर्ष में 92 क्रेडिट के साथ डिप्लोमा के साथ निकासी होगी। छह सेमेस्टर यानी तीन वर्ष के 138 क्रेडिट होंगे जिससे स्नातक की डिग्री मिलेगी। उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि इससे लीक से हटकर पढ़ाई हो सकेगी।