Thursday, June 17, 2021

भर्ती और प्रशिक्षण परीक्षाओं में पारदर्शिता बरतना बडी चुनौती

भर्ती और प्रशिक्षण परीक्षाओं में पारदर्शिता बरतना बडी चुनौती


 राज्य : बेहद कड़ा प्रतिस्पर्धा का दौर है। वह चाहे भर्ती हो या फिर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम मेँ

प्रवेश व सेमेस्टर परीक्षाएं। एक अनार सौ बीमार कौ कहावत प्रतियोगियों पर फिट बैठती है। एक-एक पद के लिए




बड़ी संख्या में दावेदर सामने आ रहे हैं। 69 हजार शिक्षक भर्ती को है ले लीजिए, पे के सापेक्ष लिखित परीक्षा

उत्तार्ण करने वालों की तादाद करीब दोगुनी रहो। ऐसे में परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से पूरा होना सबसे अहम

चुनौती है। इन दिनों प्राथमिक स्कूलों के लिए नई शिक्षक भर्ती की मांग हो रही है और नए परीक्षा नियामक

प्राधिकारी सचिव को अब्र लंब्रित परीक्षाएं समय परपूरी करानी होंगी। प्रयागराज में परीक्षा नियामक

प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी का तबादला हो गया है। उनकौ जगह संजय कुमार उपाध्याय

को भेजा गया है। अब उपाध्याय के सामने कई चुनौतियां हॉंगी। दरअसल योगी सरकार मेधावियों का चयन कराने के लिए हर भर्ती में लिखित परीक्षा करा रही है। प्राथमिक स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती की पहली बार लिखित परीक्षा वर्ष 20।8 में हुई। 68,500 पर्दों की भर्ती का परिणाम 13 अगस्त को आवा, जिसमें एक अभ्यर्थी की कापी बदलने का प्रकरण हाईकोर्ट पहुंचा। शासन ने तत्कालीन सचिव सुत्ता सिंह को आठ सितंबर को निलंबित कर दिवा, मेरठ के मंडलीय शिक्षा निदेशक रहे अनिल कल मिली। उन्होंने 10 सितंबर 2018 को कार्यभार ग्रहण किया। इसी भर्ती में उन्होंने पुनर्मुल्यांकन कराया, जिसमें 4600 से अधिक की की जि ॥ हालांकि  103 अभ्यर्यी पाने की रेस में हैं। वर्ष 2019 मैं कराई गई 69,000 पर्दे की शिक्षक भर्ती के लिए तीसरी काउंसिलिंग भी होनी है।



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