Friday, April 16, 2021

यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं परीक्षा टलने से छात्र निराश, सता रहीं ये चिंताएं

 यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं परीक्षा टलने से छात्र निराश, सता रहीं ये चिंताएं




यूपी बोर्ड की 10वीं व 12वीं की परीक्षा टलने से अधिकांश छात्र-छात्राओं में निराशा है। ज्वाला देवी सिविल लाइंस के रघुनंदन यादव, ऋषभ केशरी व सीताराम मिश्रा और ज्वाला देवी रसूलाबाद के 10वीं के छात्र आकाश शुक्ला व अर्पिता मिश्रा को परीक्षा स्थगित होने से निराशा हुई है। समझ नहीं आ रहा कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी करें या अगली कक्षा की पढ़ाई करें।


रानी रेवती देवी इंटर कॉलेज राजापुर में 10वीं के छात्र ऋषभ पांडेय के अनुसार परीक्षा टलने से वैसे तो कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन अगली कक्षा की पढ़ाई में देरी होने पर उस पर प्रभाव पड़ेगा। इसी स्कूल के 10वीं के छात्र आदित्य झा का मानना है कि यह विद्यार्थियों के लिए सुअवसर है। हमें पूरी तैयारी के साथ परीक्षा में प्रतिभाग करना है और अपना सर्वश्रेष्ठ देना है।


रानी रेवती देवी में 12वीं की छात्रा संध्या शर्मा कहती हैं कि परीक्षा में देरी होने से आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने में कठिनाई हो रही है। आगे बढ़ने के अवसर कम हो रहे हैं। 12वीं के ही अमन सिंह कहते हैं कि बोर्ड परीक्षा की तारीख आगे बढ़ने से अनिश्चितता बढ़ गई है। इसकी वजह से बच्चों में तनाव और चिंता आदि पैदा होगी। 


ज्वाला देवी सिविल लाइंस के 12वीं के छात्र नाइस यादव, ज्वाला देवी रसूलाबाद में 12वीं के छात्र अजीत सिंह ने बताया कि परीक्षा टलने से निराशा हुई। बोर्ड परीक्षा में देरी होने से एक ही चीज बार बार पढ़नी पड़ रही है। आगे की तैयारी में बाधा आ रही है। 12वीं की श्रेया मिश्रा के अनुसार परीक्षा टलने से डर से निकलने का अवसर मिलेगा। हालात सामान्य होने पर परीक्षा और उत्साह से देंगे।

बांके बिहारी पांडेय (प्रधानाचार्य रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर) ने कहा, परीक्षा टलना तो बहुत सुखद नहीं है लेकिन कोरोना की भयावह स्थिति को देखते हुए यह निर्णय अच्छा है। परीक्षाएं जरूर संपन्न हों क्योंकि बिना मूल्यांकन के परीक्षा का कोई महत्व नहीं है। इससे जिन छात्रों ने बड़ी मेहनत और लगन से  तैयारी की है, उन पर अच्छा असर नहीं पड़ेगा।


कदम-कदम पर बाधा, कभी न आई ऐसी मुसीबत 

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में कदम-कदम पर बाधा आ रही है। इससे पहले कभी इतनी मुसीबत आई हो, किसी को याद नहीं। इतनी अधिक ऊहापोह के कारण बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकृत 56 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं भी असहज हैं। पंचायत चुनाव के कारण 7 अप्रैल को ही टाइम टेबल संशोधित हुआ था।

24 अप्रैल से प्रस्तावित 10वीं व 12वीं की परीक्षा 8 मई से शुरू करने का फैसला हुआ था। उसके एक सप्ताह बीता कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ गईं। इससे पहले परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण में भी काफी परेशानी आई थी। पहले छात्र छात्राओं के बैठने के लिए उनके बीच दूरी के मानक में संशोधन हुआ।

25 नवंबर को जारी केंद्र निर्धारण नीति में कोरोना के मद्देनजर सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के मकसद से प्रत्येक परीक्षार्थी के लिए 36 वर्गफीट (3.34 वर्गमीटर) का क्षेत्रफल निर्धारित किया गया था। हालांकि 21 जनवरी को इसमें संशोधन करते हुए प्रत्येक परीक्षार्थी के लिए 25 वर्गफीट (2.32 वर्गमीटर) स्थान सुनिश्चित कर दिया गया। इसके कारण केंद्र निर्धारण में देरी हुई। 


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