Thursday, March 4, 2021

इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला :: बिना कोर्ट की सहमति के शिक्षा सेवा अधिकरण के गठन पर रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला :: बिना कोर्ट की सहमति के शिक्षा सेवा अधिकरण के गठन पर रोक  



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा सेवा अधिकरण की विधायी प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करते हुए कोर्ट की सहमति के बगैर अधिकरण के गठन पर रोक लगा दी है। साथ ही न्यायिक कार्य से विरत प्रयागराज व लखनऊ के वकीलों से काम पर लौटने का आग्रह किया है। इसके अलावा मुख्य न्यायाधीश से शैक्षिक व गैर शैक्षिक स्टाफ के विचाराधीन  मामलों के निस्तारण को गति देने के लिए अतिरिक्त पीठें बनाने को कहा है। 


कोर्ट ने राज्य सरकार को बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित कर  उनकी शिकायतों के निवारण का प्रयास करने का निर्देश भी दिया है। जीएसटी अधिकरण के मुद्दे पर लखनऊ बेंच में सुनवाई के कारण कोई आदेश नहीं किया है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने स्वतः कायम जनहित याचिका पर दिया है। खंडपीठ ने कहा कि कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में भी हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य सुचारू रूप से चला लेकिन शिक्षा सेवा अधिकरण की पीठ स्थापित करने के मुद्दे को लेकर देश के सबसे बडे इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हैं, जिससे न्यायिक कार्य के निस्तारण में अवरोध उत्पन्न हुआ है।


खंडपीठ ने शैक्षिक और गैर शैक्षिक स्टाफ के बीते 20 साल के मुकदमों का चार्ट देखा, जिससे पता चला कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रयागराज स्थित प्रधान पीठ में सेवा के 188632 मामलों का दाखिला हुआ, जिनमें से 33290 विचाराधीन हैं।इसी प्रकार लखनऊ खंडपीठ में 55913 मामले दाखिल हुए और 15003 विचाराधीन हैं।


शिक्षा सेवा अधिकरण कानून में लखनऊ में मुख्यालय और प्रयागराज में पीठ के गठन की व्यवस्था है। चेयरमैन को बैठने के दिन तय करने का विवेकाधिकार दिया गया है। इसके गठन को लेकर इलाहाबाद व लखनऊ के बार एसोसिएशन को शिकायत है, जिसे लेकर वे न्यायिक कार्य से विरत हैं नतीजतन हाईकोर्ट के मुकदमों के निस्तारण में अवरोध उत्पन्न हुआ है। अधिकरण गठित होने से त्वरित निस्तारण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।


शिक्षण संस्थाओं के अधिक मुकदमे प्रयागराज में हैं। ऐसे में यहां अधिक बेंच बैठाकर निस्तारण में तेजी लाई जा सकती है।न्यायिक कार्य बहिष्कार से कोर्ट के कीमती समय की बर्बादी हो रही है।इसी तरह 2019 में भी हड़ताल हुई थी। कहा कि मुकदमों के निस्तारण में वकीलों की सहभागिता जरूरी है। इसलिए न्यायिक कार्य चालू रखने को यह निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद व लखनऊ में अतिरिक्त बेंच बैठाकर मुकदमों के निस्तारण मे तेजी लाएंगे और सरकार को बार एसोसिएशन से बात करनी होगी।

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