Tuesday, February 23, 2021

UPPSC APS भर्ती 2010 :: शासन की लेटलतीफी में फंसी एपीएस भर्ती की जाँच

UPPSC APS भर्ती  2010 ::  शासन की लेटलतीफी में फंसी एपीएस भर्ती की जाँच 



 

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती 2010 की सीबीआई जांच पर अब शासन के अधिकारी कुंडली मारकर बैठ गए हैं। अफसरों की लापरवाही के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने कुछ महीने पहले घोटाले में संलिप्त लोक सेवकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के लिए आवश्यक अभियोजन स्वीकृति देने के लिए शासन के गृह विभाग को पत्र भेजा था लेकिन शासन के कुछ अफसरों ने अब तक अभियोजन स्वीकृति के आदेश जारी नहीं होने दिए।




प्रतियोगी छात्रों ने आरोप लगाया कि भर्ती घोटाले से चयनित कई अभ्यर्थी वर्तमान में शासन में महत्वपूर्ण जगहों पर पदस्थ हैं, जो अपने प्रभाव से अभियोजन स्वीकृति की अनुमति मिलने में विलम्ब कराकर जांच को विलम्बित करा रहे हैं। जांच एजेंसी ने 31 जनवरी 2018 को प्रयागराज आकर आयोग की भर्तियों की जांच शुरू की थी तो अपर निजी सचिव भर्ती 2010 के असफल अभ्यर्थियों ने भर्ती घोटाले से जुड़े तमाम पुख्ता प्रमाण जांच टीम को सौंपे थे।




जिसमें आयोग एवं शासन में पदस्थ लोक सेवकों द्वारा अपने रिश्तेदारों तथा नजदीकी अभ्यर्थियों का अनियमित चयन कराना, परीक्षकों को प्रभावित कराकर अपात्र अभ्यर्थियों को अधिक अंक दिलाना और पात्र अभ्यर्थियों के अंकों को कम कराना, हिन्दी शार्टहैंड और टाइप की परीक्षा में फेल अभ्यर्थियों को अनियमित तरीके से उत्तीर्ण दर्शाकर अधिक अंक दिलाना, फर्जी और अमान्य कम्प्यूटर प्रमाण पत्रों के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन कराना आदि आरोप शामिल थे।




दो साल की विधिवत जांच के बाद सीबीआई ने पुख्ता प्रमाण एवं साक्ष्य तैयार करने के बाद भर्ती घोटाले में संलिप्त लोक सेवकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है, जिसे शासन के जिम्मेदार अफसर दबाए हुए हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपर निजी सचिव भर्ती 2010 में घोटाला करने वाले लोक सेवकों के विरूद्ध शीघ्र अभियोजन स्वीकृति दिलाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है।

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