Tuesday, February 23, 2021

प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजो में प्रधानचार्य भर्ती की चयन सूची दोषपूर्ण , नए सिरे से चयन सूची बनाने का कोर्ट ने दिया निर्देश

प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजो में प्रधानचार्य भर्ती की चयन सूची दोषपूर्ण , नए सिरे से चयन सूची बनाने का कोर्ट ने दिया निर्देश 



 


राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति के लिए लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश द्वारा तैयार चयन सूची को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषपूर्ण करार दिया है। कोर्ट ने आयोग को नए सिरे से नियमानुसार सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि चयन सूची में उन्ही अभ्यर्थियों को शामिल किया जाए जो पद की योग्यता रखते हैं और साक्षात्कार के समय तक संयुक्त निदेशक से प्रति हस्ताक्षरित तीन वर्ष का अध्यापन अनुभव प्रमाणपत्र पेश किया हो।



आयोग ने 33 ऐसे लोगों को प्राविधिक रूप से  चयन सूची में शामिल कर लिया था जिन्होने संयुक्त निदेशक से प्रति हस्ताक्षरित अनुभव प्रमाणपत्र दाखिल नहीं किया है। अब  ऐसे अभ्यर्थियों को चयन सूची से बाहर कर नए सिरे से चयन सूची जारी की जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने अशोक कुमार व 6अन्य की याचिका पर दिया है।



 आयोग ने 2018में संयुक्त भर्ती विज्ञापन निकाला। जिसमें आवेदन के समय  पद की योग्यता रखने वालों से तीन वर्ष का अनुभव प्रमाणपत्र संयुक्त निदेशक माध्यमिक से प्रति हस्ताक्षरित कराकर जमा करना था।लिखित परीक्षा में प्रधानाचार्य पद के लिए 248 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए और साक्षात्कार के लिए बुलाया गया।


सभी से संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा से प्रति हस्ताक्षरित अनुभव प्रमाणपत्र लाने का कहा गया। यह कोर्ट के आदेश पर किया गया था क्योंकि कुछ लोग आन लाइन फार्म भरते समय अनुभव प्रमाणपत्र नहीं भेज सके थे।कोर्ट ने साक्षात्कार के समय प्रमाणपत्र देने की छूट दी।11सितंबर 20 को परिणाम घोषित किया गया तो 33ऐसे लोगों का नाम शामिल था जिन्होने साक्षात्कार के समय अनुभव प्रमाणपत्र नहीं दिया था। जिसे चुनौती दी गई।और उन्हे चयन सूची से हटाने की मांग की गई।


याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आर के ओझा का कहना था कि अनुभव प्रमाणपत्र प्रति हस्ताक्षरित न हो पाने के कारण कई लोग साक्षात्कार नहीं दे सके।ऐसे में कुछ लोगों को चयनित कर मौका देना भेदभाव पूर्ण है।आयोग अपनी ही अधिसूचना का उल्लंघन कर रहा है।जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।


आयोग की तरफ से कहा गया कि मूल प्रमाणपत्र देखकर प्रोविजनल रूप से चयन सूची में रखा गया है।कोर्ट ने इसे सही नहीं माना और कहा कि आयोग अपनी अधिसूचनाओं का पालन कर चयन सूची तैयार करे।


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