Sunday, January 3, 2021

UPPSC :: सीबीआई जाँच को तीन साल हुए पूरे , सिर्फ एक मुकदमा अभी तक हुआ दर्ज , सपा शासनकाल में हुई भर्तियों की चल रही जाँच , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

UPPSC :: सीबीआई जाँच को तीन साल हुए पूरे , सिर्फ एक मुकदमा अभी तक हुआ दर्ज , सपा शासनकाल में हुई भर्तियों की चल रही जाँच , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 



जनवरी -2018 के पहले दिन सीबीआई की टीम जब जांच शुरू करने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) परिसर में दाखिल हुई तो प्रतियोगी छात्रों को लगा कि परीक्षाओं में हुईं गड़बड़ियों के खुलासे का वक्त आ गया है। भर्ती में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने और जेल जाने वाले छात्रों को सीबीआई से ढेरों उम्मीदें थीं। जांच को तीन साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन जांच एजेंसी ने अब तक केवल एक मुकदमा दर्ज किया है और वह भी आयोग के अज्ञात अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ है। तीन साल बाद भी कोई भी कार्रवाई न होने से प्रतियोगी छात्र हताश हैं और अब सवाल उठा रहे हैं कि सीबीआई ने अपनी जांच धीमी क्यों की है। जबकि हजारों छात्र अपने कैटर को चिपक पर लगाकर सीबीआई के समक्ष शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे।

सीबीआई की टीम आयोग की उन परीक्षाओं की जांच कर रही है, जिनके परिणाम अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच जारी किए गए थे। इसके साथ ही अपर निजी सचिव (एपीएस) परीक्षा -2010 की जांच के लिए सीबीआई ने प्रदेश सरकार से विशेष अनुमति ली थी। इस तरह सीबीआई कुल 598 परीक्षाओं की जांच कर रही हैं, जिनके तहत लगभग 40 हजार अभ्यर्थियों का चयन किया गया। तीन साल की जांच के दौरान के दौरान सीबीआई ने सिर्फ पीसीएस -2015 में गड़बड़ी को लेकर मुकदमा दर्ज किया, जिसमें आयोग के अज्ञात अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों को संदिग्ध माना गया है, लेकिन सुधारों को चिह्नित नहीं किया गया। 


इसके अलावा सीबीआई को कई अन्य परीक्षाओं में भी गड़बड़ी मिली है। हालत यह है कि परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर सीबीआई के पास अब तक 11 हजार से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई के गोविंदपुर स्थित कैंप कार्यालय में अब तक लगभग ए हजार योग्य चयनित अभ्यर्थियों, आयोग के पूर्व और वर्तमान अफसरों एवं कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है। वहीं, दिल्ली स्थित मुख्यालय में भी तकरीबन पांच सौ लोगों को बुलायाकर इंटर की जा चुकी है। जांच की इतनी लंबी प्रक्रिया के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से प्रतियोगी छात्र हताश हैं। 


 

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