Thursday, December 3, 2020

यूपी पुलिस की नौकरी से युवाओं का मोहभंग, 33 ने दिया इस्तीफा, बन रहे मास्टरजी , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट

 यूपी पुलिस की नौकरी से युवाओं का मोहभंग, 33 ने दिया इस्तीफा, बन रहे मास्टरजी , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट 





न नौकरी के घंटे और न छुट्टी तय। घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहना-सहना। कभी गृहजनपद में नौकरी नहीं कर सकते। शायद यही वजह है कि युवाओं का यूपी पुलिस से मोहभंग हो रहा है। खाकी वर्दी पहनने का सपना पाले तमाम नौजवानों की पहली पसंद अब मास्साब बनना है। मेरठ में ज्वाइनिंग से पहले ही 33 लोगों ने पुलिस से त्यागपत्र दे दिया है। ज्यादातर ने प्राइमरी स्कूल में शिक्षक पद पर नियुक्ति पाई है। प्रदेश के अधिकांश जनपदों में यही स्थिति सामने आई है।


मेरठ पुलिस लाइन में छह अक्तूबर से यूपी पुलिस आरक्षी प्रशिक्षुओं की जूनियर ट्रेनिंग शुरू हुई। 268 जवानों को कॉल लेटर भेजा गया। 237 ने ही ट्रेनिंग में आमद दर्ज कराई। 31 लोग ट्रेनिंग में नहीं आए। पुलिस लाइन से फोन करके इनसे नहीं आने का कारण पूछा गया तो पता चला कि ज्यादातर का नंबर प्राथमिक स्कूलों की 69 हजार शिक्षक भर्ती में आ गया है। इसके अलावा दो युवकों की तैनाती दूसरे विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर हुई है।


रंगरूटों की संख्या ज्यादा

गोरखपुर-बस्ती मंडल के 53 सिपाहियों ने शिक्षक बनने के लिए खाकी वर्दी त्याग दी। कुशीनगर में 22 पुलिसकर्मियों ने त्यागपत्र देकर शिक्षक की नौकरी पा ली। राजस्थान के जयपुर में भी 43 पुलिसकर्मियों ने रिजाइन दिया और शिक्षक बन गए। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, गाजियाबाद, नोएडा समेत अधिकांश जनपदों में हाल ही में ऐसे कुछ पुलिसकर्मियों ने इस्तीफा दिया है जो पिछले दिनों ही ट्रेनिंग पर आए थे।


प्रमुख वजह

शिक्षकों का वेतन पे बैंड जहां 4200 रुपये है, वहीं पुलिस का वेतन पे बैंड 2000 रुपये है। शिक्षक की एक साल में संडे, सार्वजनिक अवकाश और कैजुअल लीव मिलाकर करीब 100 छुट्टियां होती हैं। पुलिसकर्मियों को सालभर में 60 छुट्टियां स्वीकृत हैं, लेकिन उन्हें अधिकतम 20 छुट्टी ही मिल पाती हैं। शिक्षकों को पहला प्रमोशन औसत दस साल में मिल जाता है, जबकि पुलिसकर्मियों को पहला प्रमोशन मिलने में पन्द्रह साल तक लग जाते हैं। शिक्षकों की ड्यूटी सात घंटे होती है, लेकिन पुलिस की ड्यूटी 12 से 15 घंटे औसतन होती है। शिक्षक घर के समीप वाले स्कूल में पढ़ाते हैं, जबकि पुलिसकर्मी गृहजनपद और सीमा वाले जनपद में नौकरी नहीं कर सकते।


अजय साहनी (एसएसपी मेरठ) ने कहा, यूपी पुलिस में अब उच्च शिक्षित युवा आ रहे हैं। वह पुलिस के अलावा दूसरी भर्तियों में भी हाथ आजमाते हैं। कई बार एक अभ्यर्थी का नंबर कई जगह एकसाथ आ जाता है। ऐसे में वह विकल्प में रूप में उस नौकरी को चुनता है जो ज्यादा आसान होती है। इसके बावजूद भी खाकी पहनने के लिए युवाओं में जबरदस्त क्रेज है।


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