Monday, December 21, 2020

टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स: 21 दिसंबर 2020, क्लिक करे और पढ़े

 टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स: 21 दिसंबर 2020, क्लिक करे और पढ़े 




कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा का निधन

मोतीलाल वोरा का जन्म 20 दिसंबर 1928 को नागौर (तब जोधपुर रियासत) में हुआ था. उनके पिता का नाम मोहनलाल वोरा और मां का नाम अंबा बाई था. मोतीलाल वोरा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं. मोतीलाल वोरा गांधी परिवार के बेहद करीबी थे.


मोतीलाल वोरा ने साल 1993 में उत्तर प्रदेश के गवर्नर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी और 3 साल तक वह यूपी के राज्यपाल थे. इसके अतिरिक्त वोरा केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी संभाल चुके हैं. उनको 13 फरवरी 1985 में मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया.


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की पहली हाइपरसोनिक पवन सुरंग सुविधा का किया उद्घाटन

रक्षा मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रूस और अमेरिका के बाद, भारत परिचालन क्षमता और आकार के मामले में इतनी बड़ी सुविधा रखने वाला तीसरा देश बन गया है. मंत्रालय ने आगे यह कहा कि, इस सुविधा का विकास स्वदेश में किया गया है.


इस हाइपरसोनिक विंड टनल सुविधा में व्यापक स्पेक्ट्रम पर हाइपरसोनिक प्रवाह का अनुकरण करने की क्षमता है. यह भावी उच्च जटिल एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों को तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. रक्षा मंत्री ने DRDO के युवा वैज्ञानिकों की प्रयोगशालाओं के योगदान की सराहना की.


हिमाचल प्रदेश में ‘जबरन धर्मांतरण’ के खिलाफ कानून लागू, जानिए कितनी मिलेगी सजा

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता कानून, 2019 को 18 दिसंबर को राज्य के गृह विभाग द्वारा अधिसूचित कर दिया गया. यह 2006 के कानून की जगह लेगा, जिसे विधानसभा ने निरस्त कर दिया है. अब बड़े राज्य भी ऐसे कानून बनाने की पहल कर रहे हैं.


हिमाचल में बने धर्मांतरण कानून के तहत जबरन धर्मांतरण, प्रलोभन या झांसा देकर करवाया गया धर्मांतरण संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इसके अतिरिक्त, धर्मपरिवर्तन के उद्देश्य से किया गया विवाह भी मान्य नहीं होगा और ऐसे विवाह को चुनौती दी जा सकेगी. ऐसे मामले फैमिली कोर्ट में सुने जाते हैं.


अमेरिका की स्पेस फोर्स को मिला नया नाम, अब कहलाएंगे गार्जियंस

अमेरिका में लगभग दो साल पहले इस फोर्स के गठन का घोषणा किया गया. यह फोर्स अमेरिका के छठे सशस्‍त्र बल के रूप में सामने आया. इससे जुड़े जवान वास्‍तविक रूप से अंतरिक्ष में तैनात नहीं होते बल्कि अमेरिकी उपग्रहों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं.


स्‍पेस के क्षेत्र में रूस और चीन अमेरिका के दो बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं. दोनों बड़े प्रतिद्वंद्वियों के तौर पर अमेरिका के सामने न केवल स्पेस, बल्कि अमेरिकी  सेना के समक्ष भी चुनौती पेश करते हैं. साल 2015 में चीन ने तो एक स्ट्रैटजिक सपॉर्ट फोर्स तैयार की थी, जो उसे स्पेस, सायबर और इलेक्ट्रोनिक से जुड़े युद्ध मिशन में मदद करती है.


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