Tuesday, November 17, 2020

पाठ्यक्रम समान, पर अर्हता में अंतर, कला विषय में चयन बोर्ड और यूपीपीएससी के भर्ती मानकों में अंतर से फंसी नौकरी


पाठ्यक्रम समान, पर अर्हता में अंतर, कला विषय में चयन बोर्ड और यूपीपीएससी के भर्ती मानकों में अंतर से फंसी नौकरी

प्रयागराज : अशासकीय विद्यालय हो या राजकीय विद्यालय, दोनों जगह पाठ्यक्रम एक समान है। लेकिन, इन पाठ्यक्रमों को पढ़ाने के लिए शिक्षिकों की अर्हताएं अलग अलग निर्धारित की गई हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से कला विषय के लिए निर्धारित अर्हता में अंतर से विवाद बढ़ता जा रहा है और बड़ी संख्या में चयनित होने के बाद भी अभ्यर्थी नौकरी से वंचित हो रहे हैं। एलटी समर्थक मोर्चा ने मांग की है कि जब पाठ्यक्रम एक समान है तो अर्हता भी समान होनी चाहिए। साथ ही जिन अभ्यर्थियों का चयन हो चुका है, उन्हें नियुक्ति मिलनी चाहिए।


अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड करता है और राजकीय विद्यालयों में एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग करता है। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने सहायक अध्यापक कला पद के लिए जो अर्हता निर्धारित कर रखी है, उसके अनुसार प्रावधिक कला से इंटरमीडिएट एवं सामान्य स्नातक होना चाहिए। वहीं, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने जो अर्हता निर्धारित की है, उसके तहत ललित कला से स्नातक यानी बीएफए और बीएड की डिग्री होनी चाहिए अथवा ड्राइंग, पेंटिंग से स्नातक और बीएड की डिग्री होनी चाहिए।




अर्हता के विवाद के कारण माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित अभ्यर्थियों को अब बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं कि जब पाठ्यक्रम एक समान है तो अर्हता में अंतर क्यों? माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से निर्धारित अर्हता का विवाद न्यायालय तक पहुंच गया है। वहीं, राजकीय विद्यालयों के लिए सहायक अध्यापक कला के 468 पदों के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग चयनित अभ्यर्थियों में से तकरीबन ढाई सौ अभ्यर्थी अर्हता के विवाद के कारण दौड़ से बाहर हो गए हैं।

चयन बोर्ड और लोक सेवा आयोग की ओर की परीक्षाओं में एक ही पद के लिए निर्धारित अलग-अलग अर्हता में उलझे अभ्यर्थियों को अब कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा। अर्हताओं में विरोधाभास है। एलटी समर्थक मोर्चा के संयोजक विक्की खान का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से अर्ह मानता है, वह आयोग की परीक्षा के लिए अनह है और लोक सेवा आयोग ने जो अर्हता निर्धारित कर रखी है, वह चयन बोर्ड की परीक्षाओं के लिए अनह है। अभ्यर्थियों की मांग है कि जिस तरह अशासकीय और राजकीय विद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम हैं, उसी प्रकार अर्हता भी एक जैसी होनी चाहिए