Monday, August 3, 2020

खंड शिक्षा अधिकारी , बीएड परीक्षा पर घमासान , सीएम को लिखे छात्रों ने सैकड़ो पत्र , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

खंड शिक्षा अधिकारी , बीएड परीक्षा पर घमासान , सीएम को लिखे छात्रों ने सैकड़ो पत्र  , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 







देश के गृहमंत्री कोरोना से संक्रमित हो गए हैं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है और रविवार को कोरोना संक्रमण के कारण तकनीकी शिक्षामंत्री का निधन हो गया। यह सभी लगातार सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे थे। इनके पास ढेरों सुविधाएं भी हैं। ऐसे में जब प्रदेश की सड़कों पर लाखों की संख्या में आम अभ्यर्थी परीक्षा देने निकलेंगे तो उन्हें कोरोना से कौन बचाएगा? प्रतियोगी छात्रों ने यह सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को सैकड़ों की संख्या में ट्वीट और री-ट्वीट किए हैं। साथ ही पत्र लिखे हैं और मांग की है कि बीएड प्रवेश परीक्षा, खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) प्रारंभिक परीक्षा समेत अगस्त में प्रस्तावित सभी परीक्षाएं स्थगित की जाएं।
बीएड की प्रवेश परीक्षा नौ अगस्त को प्रस्तावित है। वहीं, बीईओ की प्रारंभिक परीक्षा 16 अगस्त को होनी है। बीएड की प्रवेश परीक्षा में तकरीबन पांच लाख और बीईओ की प्रारंभिक परीक्षा में साढ़े पांच लाख अभ्यर्थियों को शामिल होना है। प्रांतीय सिविल सेवा मार्गदर्शक दुर्गेश शांडिल्य के नेतृत्व में प्रतियोगी छात्रों ने रविवार शाम चार से सात बजे तक ‘उत्तर प्रदेश का प्रतियोगी मांगे प्राण की भीख’ अभियान चलाकर मुख्यमंत्री को सैकड़ों की संख्या में ट्वीट, री-ट्वीट किए। वहीं, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के निवर्तमान उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर और सीएमपी डिग्री कॉलेज छात्र परिषद के पूर्व अध्यक्ष करन सिंह परिहार ने राज्यपाल को ट्वीट कर बीएड प्रवेश परीक्षा स्थगित किए जाने की मांग की।
प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि जरा सी गलती पर लोग कोरोना संक्रमित हो जा रहे हैं। ऐसे में जब लाखों छात्र परीक्षा देने निकलेंगे और परीक्षा केंद्रों में परीक्षार्थियों की भीड़ जुटेगी, तो कोरोना संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ेगा। बेरोजगार युवा भी चाहते हैं कि परीक्षाएं समय से हों और नौकरी जल्दी मिले, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि छात्रों की जान को खतरे में डाल दिया जाए। तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के बीच छात्र मानसिक रूप से भी परीक्षाएं देने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए परीक्षाएं स्थगित करना ही उचित है।