Saturday, August 22, 2020

एनआरए के गठन से बैंकों में तीन नहीं अब होगी एक भर्ती परीक्षा , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

एनआरए के गठन से बैंकों में तीन नहीं अब होगी एक भर्ती परीक्षा , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 





राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (एनआरए) के गठन से बैंक की भर्ती परीक्षाओं की तैयारी में जुटे प्रतियोगियों को बड़ा फायदा होगा। उन्हें तीन अलग-अलग तरह के बैंकों की भर्ती परीक्षाओं में नहीं शामिल होना होगा। सिर्फ एक परीक्षा देनी होगी। इतना ही नहीं इसी परीक्षा के आधार पर उन्हें कर्मचारी चयन आयोग और रेलवे की भर्तियों में शामिल होने का भी विकल्प मिलेगा।
अभी भारतीय स्टेट बैंक, राष्ट्रीय बैंकों तथा ग्रामीण बैंकों के लिए अलग भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। राष्ट्रीयकृत तथा ग्रामीण बैंकों में भर्ती आईबीपीएस करता है। एनआरए के गठन के बाद तीनों तरह के बैंकों में भर्ती के लिए एक परीक्षा होगी।
बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं की काउंसलर पद्मा पांडेय का कहना है कि इससे प्रतियोगियों पर से दबाव तो कम होगा ही, पद भी खाली नहीं रहेंगे। पद्मा ने बताया कि अभी बड़ी संख्या में मेधावी प्रतियोगियों का तीनों तरह के बैंक की भर्तियों में चयन हो जाता है। ऐसे में उन्हें दो नौकरी छोड़नी पड़ती है। इससे पद रिक्त हो जाते हैं और इनके लिए दोबारा परीक्षा करानी पड़ती है। नई व्यवस्था में इससे राहत मिलेगी। वहीं काउंसलर पंकज पांडेय का कहना है कि एक परीक्षा होने से स्थानीय प्रशासन पर भी रोज-रोज परीक्षा कराने का दबाव कम होगा। इससे परीक्षा की शुचिता भी बढ़ेगी। कोचिंग के जाल से मिलेगी राहत
विशेषज्ञों के अनुसार समान पात्रता परीक्षा (सीईटी) से प्रतियोगियों पर से तनाव और आर्थिक बोझ कम होगा। उन्हें कोचिंग के जाल से भी राहत मिलेगी। अभी प्रतियोगियों को हर भर्ती परीक्षा के लिए अलग-अलग कोचिंग करनी पड़ती है। इसके अलावा हर भर्ती निकलने पर कुछ महीनों के क्रैश कोर्स भी शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा हर भर्ती परीक्षा के लिए पत्रिकाएं एवं किताबें बाजार में आ जाती हैं। प्रतियोगी इनका मोह भी नहीं छोड़ पाते। सीईटी के बाद उन्हें इससे मुक्ति मिल जाएगी। सीईटी का एक सिलबेस होगा। ऐसे में संघ लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा की तरह उन्हें एक वर्ष तक पूरी तैयारी करनी होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार सीईटी के लाभ
बार-बार फार्म भरने और परीक्षा से राहत
एक सिलेबस होगा, नहीं करनी होगी अलग-अलग तैयारी
प्रतियोगियों पर कम होगा आर्थिक दबाव
प्रशासनिक स्तर सहूलियत बढ़ेगी
एक परीक्षा से शुचिता बढ़ेगी
लेकिन विभागों को देना पड़ेगा अलग से प्रशिक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार हर विभाग में अलग-अलग कार्यसंस्कृति है। बैंक में ऐसे कर्मचारियों की भर्ती की जाती है जो बैंकिंग योजनाओं को लोगों तक आसानी से पहुंचा सके। इसके अलावा छोटी सी चूक भारी पड़ जाती है। इसके विपरीत एसएससी की भर्तियों में कई ऐसे पद हैं, जहां पब्लिक इंट्रैक्शन कम से कम हो। पद्मा का कहना है कि भर्ती एजेंसियां इसे ध्यान में रखकर पेपर तैयार करती हैं। खासतौर पर, रीजनिंग के पेपर में इसका विशेष ध्यान रखा जाता है लेकिन नई व्यवस्था में भर्ती एजेंसियों को मुख्य परीक्षा का पेपर तैयार करते समय इस पर अधिक जोर देना होगा। इसके अलावा विभागों में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने होंगे।