Wednesday, August 26, 2020

फर्जीवाड़ा :: यूपी पुलिस सिपाही से एसडीएम बने श्याम बाबू बर्खास्त , पीसीएस 2016 में हुआ था चयन , जाति प्रमाणपत्र गलत पाया गया , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

फर्जीवाड़ा :: यूपी पुलिस सिपाही से एसडीएम बने श्याम बाबू बर्खास्त , पीसीएस 2016 में हुआ था चयन , जाति प्रमाणपत्र गलत पाया गया , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 




 प्रदेश सरकार ने जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के आधार पर संतकबीरनगर में कार्यरत उपजिलाधिकारी (परिवीक्षाधीन) श्याम बाबू की नियुक्ति रद्द कर दी है। नियुक्ति विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि श्याम बाबू 2016 की पीसीएस परीक्षा में अंतिम रूप से चयनित हुए थे। पहले वह यूपी पुलिस में हेड कॉन्सटेबल थे। उन्हें संतकबीरनगर में परिवीक्षाधीन डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनाती दी गई थी। जांच में उनका अनुसूचित जन जाति का प्रमाणपत्र गलत पाया गया। गलत प्रमाणपत्र के आधार पर चयन के मद्देनजर उन्हें सेवा से मुक्त कर दिया गया है। श्याम बाबू बलिया के रहने वाले हैं।
श्याम बाबू वर्ष 2005 में यूपी पुलिस में भर्ती हुए थे। प्रयागराज स्थित पुलिस मुख्यालय में तैनाती के दौरान उन्होंने पीसीएस परीक्षा की तैयारी की और इस साल 22 फरवरी 19 को जारी पीसीएस 2016 के परिणाम में श्याम बाबू का डिप्टी कलेक्टर के पद पर अंतिम रूप से चयन हो गया। इस बीच उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग आयोग को शिकायतें मिलीं कि कुछ अभ्यर्थियों की ओर से (गोंड नायक) अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया जा रहा है। इस पर आयोग ने अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए जाति प्रमाणपत्रों की संबंधित जिलों में जांच कराई। श्याम बाबू पुत्र धर्मनाथ राम बलिया में बैरिया तहसील के इब्राहिमाबाद उपरवार के रहने वाले हैं। बलिया के डीएम के निर्देश पर बैरिया के तहसीलदार ने श्याम बाबू की ओर से प्रस्तुत किए गए गोंड जाति के अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र की जांच की और पाया कि श्याम बाबू का जाति प्रमाणपत्र वैध नहीं है। इससे पूर्व तहसीलदार ने श्याम बाबू को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा था। श्याम बाबू ने जवाब दिया कि उनके पूर्वजों के पास जमीन नहीं थी। सो उन्होंने अपने गोन्हियाछपरा निवासी परमानंद साह की 1359 फसली की खतौनी लगा दी।
तहसीलदार की ओर से डीएम को दी गई जांच रिपोर्ट में कहा गया कि उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा कई मामलों में यह विधि व्यवस्था प्रतिपादित की गई है कि किसी व्यक्ति की जाति का निर्धारण उसके पिता से होता है, रिश्तेदारों की जाति से नहीं। इसके अलावा श्याम बाबू ने अपनी जाति गोंड के संबंध में जो प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए हैं, वे शासनादेश के आधारों को पूर्ण नहीं करते हैं। ऐसे में जाति प्रमाणपत्र शासनादेश के अनुसार वैध नहीं है।