Thursday, July 2, 2020

UPSSSC VDO भर्ती 2016 में चयनितो की बर्खास्तगी पर जवाब तलब , आयुक्त ग्राम विकास के आदेश को दी गयी चुनौती , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

UPSSSC VDO भर्ती 2016 में चयनितो की बर्खास्तगी पर जवाब तलब , आयुक्त ग्राम विकास के आदेश को दी गयी चुनौती , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 





ग्राम विकास अधिकारी भर्ती 2016 में चयनित भूतपूर्व सैनिकों (एक्स सर्विस मैन) को नियुक्ति के बाद सेवा से बर्खास्त करने के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई सात जुलाई को होगी। सुधीर सिंह और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने यह आदेश दिया है। 

याचीगण का पक्ष रख रहे अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि चयन आयोग ने 2016 में 3133 पदों पर ग्राम विकास अधिकारियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके लिए अर्हता इंटरमीडिएट या समकक्ष और कंप्यूटर में ट्रिपल सी का सार्टिफिकेट अनिवार्य था। परीक्षा का परिणाम 18 जुलाई 2018 को जारी किया गया। याचीगण उसमें सफल रहे मगर उनको परिणाम यह कहते हुए रोक दिया गया कि उनके पास निर्धारित योग्यता, कंप्यूटर में ट्रिपल सी सार्टिफिकेट नहीं है।
कमीशन ने याचीगण का मामला राज्य सरकार को रिफर कर दिया। इसके बाद 24 दिसंबर 2018 को आयोग ने नोटिस जारी कर याचीगण को अपनी कंप्यूटर में योग्यता के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने के लिए कहा। याचीगण ने अपने प्रमाणपत्र आयोग के सामने प्रस्तुत किए। इनमें से कुछ ने बीएड में कंप्यूटर विषय की पढ़ाई की थी जबकि कुछ ने टेलीकॉम में डिप्लोमा किया था। आयोग ने इन प्रमाणपत्रों को मान्यता दे दी।


इसके बाद राज्य सरकार ने भी शासनादेश जारी कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने स्नातक या उच्च शिक्षा में कंप्यूटर की पढ़ाई एक विषय के रूप में की है उनको भी अर्ह माना जाए। इस आधार पर याचीगण को सात फरवरी 2019 को नियुक्ति मिल गई। मई 2019 में कमिश्नर ग्राम विकास ने एक आदेश जारी कर याचीगण को अर्हता पूरी न करने के आधार पर सेवा से बाहर करने का निर्देश दिया। कमिश्नर ने आधार लिया कि याचीगण के पास कंप्यूटर में ट्रिपल सी सार्टिफिकेट नहीं है।


साथ ही आवेदन करने की अंतिम तिथि दस फरवरी 2016 को वे सेना से रिटायर नहीं हुए थे। कमिश्नर के आदेश पर याचीगण को मार्च 2020 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अधिवक्ता का तर्क था कि याचीगण की नियुक्ति चयन आयोग ने की है इसलिए सेवा समाप्त करने का कमिश्नर को अधिकार नहीं है। उनकी शैक्षिक योग्यता स्वयं आयोग ने स्वीकार की है। राज्य सरकार ने भी शासनादेश जारी कर स्नातक में कंप्यूटर की पढ़ाई करने वालों को योग्य करार दिया है।


जहां तक आवेदन से पूर्व रिटायर होने की बात है, भारत सरकार ने 27 अक्तूबर 1986 को अधिसूचना जारी कर एक्स सर्विस मैन को छूट दी है कि वह रिटायर होने से एक वर्ष पहले सिविल सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक्स सर्विस मैन के मामले में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार केंद्र सरकार को है। राज्य सरकार के पास कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इन दलीलों को सुनने के बाद राज्य सरकार को पूरे मामले की जानकारी देने का निर्देश दिया है।