Monday, May 11, 2020

प्रश्नो के विवाद में उलझी 69 हजार अध्यापक भर्ती परीक्षा , अभ्यर्थियों का दावा , दो सवालो के गलत विकल्पों को पीएनपी ने माना सही , कोर्ट जाने की तैयारी में अभ्यर्थी , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

प्रश्नो के विवाद  में उलझी 69 हजार अध्यापक  भर्ती परीक्षा , अभ्यर्थियों का दावा ,  दो सवालो के गलत विकल्पों को पीएनपी ने माना सही , कोर्ट जाने की तैयारी में अभ्यर्थी , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 






परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रश्नों के विवाद में उलझ गई है। अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि लिखित परीक्षा में पूछे गए दो सवालों के गलत विकल्पों को परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने सही माना है। आपत्ति दर्ज कराने का समय बीत चुका है, सो अभ्यर्थी इस मामले में न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में भर्ती पर संकट मंडराता नजर आ रहा है।

अभ्यर्थियों का दावा है कि लिखित परीक्षा के दौरान ‘बी’ सिरीज की बुकलेट में सवाल नंबर 74 के पहले विकल्प को पीएनपी से नहीं माना है। सवाल था कि भारत में गरीबी का आकलन किस आधार पर किया जाता है? इस पहला विकल्प था, ‘परिवार का उपभोग व्यय’ और पीएनपी ने इसे ही सही माना है जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि तीसरा विकल्प यानी ‘प्रति व्यक्ति व्यय’ सही होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि एनसीईआरटी की कक्षा-11 की पुस्तक के पेज नंबर 67 के अनुसार तीसरा विकल्प ही सही होना चाहिए।
इसके अलावा सवाल नंबर 14 को लेकर भी विवाद सामने आया है। सवाल है कि निम्नलिखित में कौन सा एक सामाजिक प्रेरक है। इसके चार विकल्प (आत्मगौरव, प्रेम, भूख, प्यास) दिए गए हैं। इनमें से पीएपी ने पहले विकल्प यानी ‘आत्मगौरव’ को सही माना है, जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि बीटीसी प्रथम सेमेस्टर की किताब के पेज नंबर 106 पर दी गई जानकारी के अनुसार विकल्प दो यानी ‘प्रेम’ सही होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि पीएनपी ने अपनी ही किताब में दिए गए तथ्यों का नकार दिया है।

अभ्यर्थी चाहते हैं कि पीएनपी कार्यालय उनकी आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए उत्तरकुंजी में संशोधन करे और इसी आधार पर रिजल्ट जारी करे, लेकिन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय अनिल भूषण चतुर्वेदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह अंतिम उत्तरकुंजी थी और अब किसी तरह की आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। ऐसे में अभ्यर्थी अब न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रश्नों का विवाद सामने आने के बाद परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय को अब नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।