Saturday, March 28, 2020

यूपी के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों के प्रमोशन के अवसर हुए कम , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

यूपी के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों के प्रमोशन के अवसर हुए कम , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 




निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 उत्तर प्रदेश में नौ साल बाद भी पूरी तरह से लागू नहीं हो सका है। प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के 45625 उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के पदों का निर्धारण आरटीई के मानकों के अनुरूप नहीं है। इसके कारण प्राथमिक स्कूलों के सहायक अध्यापकों के प्रमोशन के अवसर कम हो गए हैं।

दो साल पहले सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से आरती मानकों के अनुरूप पैड सृजन का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन वह आज तक लागू नहीं हो सका है। इस अधिनियम के अनुसार उच्च प्राथमिक स्कूलों में 100 बच्चों तक 3 शिक्षक अनिवार्य हैं। 100 से अधिक बच्चों पर 1 पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक का पद है। 35 बच्चों पर एक शिक्षक अनिवार्य है।

वर्तमान में 100 बच्चों तक तो 3 अध्यापकों का पद सृजित किया गया है। 100 से अधिक बच्चों पर एक पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक का भी पद सृजित है।


यूपीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष अनुराग सिंह ने बताया कि अकेले प्रयागराज में लगभग 150 पद कम सृजित किए गए हैं। पूरे प्रदेश में लगभग 14 से 15 हजार पद कम सृजित हुए हैं। जिससे शिक्षकों में बहुत निराशा है। क्योंकि उनके उच्च प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर प्रमोशन के अवसर कम हो गए हैं। उन्होंने महानिदेशक स्कूली शिक्षा से वर्तमान छात्र संख्या से पुन: पद सृजन करने की मांग की है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में जुलाई 2011 में आरटीई लागू की गई थी।