Monday, March 2, 2020

यूपी बोर्ड परीक्षा में सॉल्वर गैंग की दस्तक! , नकल विहीन परीक्षा के दावे पर माफिया का नया दांव , सॉल्वर लगाने को फुलप्रूफ प्लानिंग कई मामले आए सामने , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

यूपी बोर्ड परीक्षा में सॉल्वर गैंग की दस्तक! , नकल विहीन परीक्षा के दावे पर माफिया का नया दांव , सॉल्वर लगाने को फुलप्रूफ प्लानिंग कई मामले आए सामने , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 





यूपी बोर्ड परीक्षा नकल विहीन कराने के दावे हुए। तैयारी भी फुल प्रूफ थी, लेकिन नकल माफिया ने सॉल्वर गैंग के जरिए दबे पर सेंधमारी कर दी। ऐसा हम नहीं, बल्कि हालात खुद बता रहे हैं। एक के बाद दूसरी परीक्षा में उम्र कम दिखाकर परीक्षार्थी लगातार पकड़े गए। हाईस्कूल में उम्र, सरकारी नौकरी के लिए कम किए जाने की आशंका है, जबकि इंटर में भी ऐसे मामले सामने आना, शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ा रहा है।
विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि यह चिंतनीय है। क्योंकि स्थानीय स्तर पर इसे जांचने का कोई फुलप्रूफ तरीका नहीं। ज्यादा से ज्यादा आधार कार्ड और प्रवेश पत्र पर अंकित जन्मतिथि का मिलान होता है, जिसमें भी छह से सात साल तक का अंतर आ रहा है। जबकि कई छात्रों के आधार कार्ड तक संदिग्ध नजर आ रहे हैं।
जीआइसी से भागा था परीक्षार्थी: ऐसा ही मामला जीआइसी में पिछले दिनों पकड़ा गया। इंटर का परीक्षार्थी पेपर देने पहुंचा, लेकिन प्रवेश पत्र, आधार कार्ड और परीक्षार्थी का डील-डौल संदेह पैदा कर रहा था। अधिकारियों ने जांच की, तो परीक्षार्थी सही उत्तर नहीं दे पाया। इसलिए उससे हाईस्कूल की मार्कशीट मांगी गई, तब का गया वह अब तक लौटकर नहीं आया।
17 मामले पकड़े : पिछली तीन परीक्षा में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश अग्रवाल ऐसे ही 17 मामले पकड़ चुके हैं। सभी में उम्र खुद स्कूल संचालक ने ही कम दर्ज कराई। लिहाजा वह भी मानते हैं कि यह सब सामान्य नहीं, इसलिए वह परीक्षा में ऐसे ही मामलों पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। वहीं अगली परीक्षा में इसके लिए पहले से ही प्लान तैयार किया जाएगा।
यह अपनाया तरीका: यह तैयारी एक दिन में नहीं हुई। इस बार ज्यादा सख्ती के बाद शातिरों ने नया तरीका निकाला। बकायदा पूरी तैयारी की गई। हथियार बोर्ड परीक्षा फॉर्म को बनाया और उम्र शुरुआत में ही कम दर्ज की गई। इसकी बिसात खुद खास स्कूल संचालकों ने रखी और आधार कार्ड से जन्मतिथि मिलाए बिना फॉर्म अग्रसारित कर दिए। कई फॉर्म बिना फोटो ही अपलोड हुए, तो कई की फोटो सेंटिंग के बूते हटवा दी गई। मामला पुख्ता लगे, इसलिए सॉल्वरों के फर्जी आधार कार्ड तैयार हुए, ताकि उम्र कम होने की बात संदिग्ध न लगे, जांच हो भी तो बच निकलें।
बाद में परीक्षार्थी की जगह पेपर देने पहुंचे सॉल्वर की फोटो चस्पा कर मोहर लगाकर मामला पक्का कर दिया, क्योंकि आधार कार्ड भी उसी का था।

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