Thursday, January 16, 2020

घर के नजदीक पहुंचने के लालच में फंसे गुरुजी, वेतन के लाले , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट

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घर के नजदीक पहुंचने के लालच में तबादला करवाकर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के स्कूलों में गए शिक्षक खुद को फंसा महसूस कर रहे हैं। राजकीय हाईस्कूलों में तैनात करीब साढ़े तीन हजार शिक्षकों को चार महीने से वेतन नहीं मिला। कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां शिक्षकों को सितंबर से वेतन नहीं मिल पाया। ऐसे में राजकीय इंटर कॉलेजों से स्थानांतरित होकर अपने गृह जिले गए शिक्षक त्रस्त हैं। यही नहीं शिक्षकों के करीब 60 फीसद पद खाली होने के कारण उनके ऊपर कार्य का बोझ भी अधिक है। इसके बावजूद वेतन न मिलने से शिक्षक परेशान हैं।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2011 से वर्ष 2016 तक 1586 राजकीय हाईस्कूल खोले गए। इनमें शिक्षकों के 10800 पद थे, लेकिन सीधी भर्ती से सिर्फ 500 पद और पहले से कार्य कर रहे 3500 नियमित शिक्षकों को इंटर कॉलेजों से समायोजित किया गया। उन्हें गृह जनपद जाने का विकल्प दिया गया। फिलहाल अब शिक्षकों को आए दिन वेतन न मिलने के कारण मुसीबत का सामना करना पड़ता है। राजकीय हाईस्कूल चंदौली के शिक्षक अभिषेक कुमार कहते हैं यहां शिक्षकों को अक्टूबर महीने से वेतन नहीं मिला। वहीं प्रयागराज में तो राजकीय हाईस्कूलों के शिक्षकों को अगस्त से वेतन नहीं मिल पाया। बलरामपुर के राजकीय हाईस्कूल मधवा जोत के प्राचार्य डॉ. चंदन पांडेय कहते हैं कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और किसी तरह पढ़ाई करवाई जा रही है। ऐसे में वेतन न मिलने से परेशान हैं। यही हाल मुरादाबाद, भदोही व वाराणसी व सहारनपुर आदि जिलों की भी है।
राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष पारसनाथ पांडेय ने बताया कि राज्य परियोजना निदेशक, माध्यमिक शिक्षा अभियान कार्यालय की ओर से एक अरब छह करोड़ रुपये की धनराशि का प्रस्ताव नवंबर में भेजा था, लेकिन वह अभी तक पास नहीं हो पाया। उधर माध्यमिक शिक्षा अभियान के अपर निदेशक विष्णुकांत पांडेय कहते हैं कि चार-चार महीने से वेतन न पाने वाले शिक्षक अधिक नहीं हैं। बकाया वेतन भुगतान जल्द किया जाएगा।

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