Tuesday, August 20, 2019

अखिलेश राज में हुआ चकबंदी भर्ती घोटाले की विवेचना भी जारी , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट

अखिलेश राज में हुआ चकबंदी भर्ती घोटाले की विवेचना भी जारी , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट 





चकबंदी भर्ती घोटाले की भी विवेचना चल रही है। बता दें कि 2015-16 में तत्कालीन सपा सरकार में चकबंदी लेखपालों के रिक्त 2831 पदों को भरने का अधियाचन चकबंदी निदेशालय से यूपी अधीनस्थ सेवा चयन को भेजा गया था। आयोग को 1901 सामान्य श्रेणी, अनुसूचित जाति के 50, अनुसूचित जनजाति के 63, ओबीसी के 769 अभ्यर्थियों का चयन करना था। राजकिशोर यादव की अध्यक्षता वाले आयोग ने 2783 अभ्यर्थियों का चयन कर 12 सिंतबर 2016 को कवरिंग लेटर के साथ संबंधित सूची चकबंदी आयुक्त को भेज दी थी। खास बात यह थी कि आयोग ने सामान्य वर्ग के 1901 के बजाय 920, एससी के 50 के स्थान पर 104, एसटी के 64 के स्थान पर 65 और ओबीसी के 769 पदों के स्थान पर 1694 अभ्यर्थियों के चयन की सूची उपलब्ध कराई थी। ओबीसी के कहीं अधिक चयनित 925 अभ्यर्थियों में ज्यादातर जाति विशेष के थे। गड़बड़ी को छिपाने के लिए मौजूदा सरकार के दौरान 1364 और चकबंदी लेखपालों की भर्ती का अधियाचन 24 अगस्त 2018 को चकबंदी आयुक्त शारदा सिंह के हस्ताक्षर से आयोग को भेजा गया। इसमें 1001 सामान्य, जबकि एससी के 363 पद ही दिखाए गए। जांच में सामने आया था कि चकबंदी लेखपालों के 5376 स्वीकृत पदों में से ओबीसी के 1451 पदों के सापेक्ष 534 पद हैं जबकि सामान्य के 2690 पदों के सापेक्ष 1002 रिक्त हैं।

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