Friday, August 9, 2019

प्रदेश में फर्जी शिक्षको की नियुक्ति का मामला फिर गरमाया , विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल के दौरान उठा मुद्दा , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट

प्रदेश में फर्जी शिक्षको की नियुक्ति  का मामला फिर गरमाया ,  विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल के दौरान उठा मुद्दा , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट 





प्रदेश में फर्जी शिक्षक नियुक्ति का मामला विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल के दौरान सामने आया। सवाल शुरू होते ही एसटीएफ ने जिलावार रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में एसटीएफ टीम ने सीतापुर आकर भी साक्ष्य जुटाए हैं। बीते वर्ष एसटीएफ द्वारा पकड़े गए फर्जी टीचर और उससे जुड़े अभियोग और सूचनाओं को इकट्ठा कर पुलिस राज्य मुख्यालय के गोपनीय विभाग को प्रेषण करने का कार्य जिला पुलिस द्वारा किया गया है। एक बार फिर खुलते रिकॉर्ड के बीच कुछ जिम्मेदारों के नाम भी चर्चा के रूप में सामने आए हैं। .

सूबे में शिक्षक की नियुक्ति के नाम पर कई स्थानों पर फर्जीवाड़ा हो चुका है। असली-नकली के खेल में एक शिक्षक के कागजात का सहारा लेकर कई लोग लंबे समय तक नौकरी कर चुके हैं। इस खेल को जानने के लिए विधानसभा के प्रश्नकाल में जानकारी मांगी गई तो एसटीएफ और पुलिस की गोपनीय शाखा ने सूचनाओं का तालमेल बनाया। .

गुरूवार को लखनऊ से एसटीएफ कोतवाली नगर पहुंची। पुराने रिकार्ड खंगाले गए तो पता चला कि वर्ष 2018 में संतकबीरनगर के शिवपारा थानाक्षेत्र स्थित भटौली निवासी शत्रोहन पुत्र रामदुलारे को सीतापुर से एसटीएफ निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा और उनकी टीम ने गिरफ्तार किया था। इसी का भाई रामानंद अंबेडकरनगर से पकड़ा गया था। दोनों ही भाई गोरखपुर के रहने वाले एक शिक्षक के कागजात पर काफी समय से सरकार को चपत लगा रहे थे। साक्ष्य जुटाने के दौरान जांच में कुछ जिम्मेदारों के नाम भी सामने आए। देर शाम जांच आख्या, प्रगति रिपोर्ट और अन्य संबंधित अभिलेख एसटीएफ अधिकारी लेकर चले गए। अभियोग से संबंधित पत्रावलियां गोपनीय विभाग को भी प्रेषित की गई हैं।.

शहर कोतवाल अंबर सिंह का कहना है कि विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल के दौरान फर्जी टीचर की गिरफ्तारी से जुड़े अभिलेख मांगे गए थे, इसे प्रेषित किया गया है।.

शिक्षा विभाग कार्यालय के करीब चहलकदमी: पुलिस की विशेष शाखा की चहलकदमी शिक्षा विभाग कार्यालय के करीब तक रही। सूत्रों की मानें तो चार्जशीट में कागज शामिल हुए, उसमें कुछ नंबर भी सामने आए थे। जिस पर फर्जी टीचर ने लंबी बातचीत की थी। इसी को तलाशने के लिए एसटीएफ ने शिक्षा विभाग के दफ्तर के करीब कुछ साक्ष्य खंगाले है। सूत्रों की मानें तो संदिग्ध दो नंबर अभी भी चल रहे हैं। .