Saturday, August 24, 2019

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का इंटरव्यू , क्लिक करे और पढ़े

 केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री  रमेश पोखरियाल निशंक का इंटरव्यू , क्लिक करे और पढ़े 


नई सरकार को जिम्मा संभाले 70 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। मंत्रलय ने इस दौरान कौन से ऐसे नए कदम उठाए है, जो शिक्षा को और ज्यादा मजबूती देंगे।
जवाब- मंत्रलय ने इस दौरान कई बड़े कदम उठाए हैं। पहला-परामर्श है, तीन करोड़ से ज्यादा छात्रों को इससे फायदा मिलेगा। इसके तहत नैक की रैंकिंग में शीर्ष स्थान रखने वाले प्रत्येक संस्थानों को अपने आसपास के पांच संस्थानों को अपने साथ जोड़ना है। दूसरा कदम-दीक्षारंभ है जिससे रै¨गग जैसी बुराई से छात्रों को बचाया जा सकेगा। विश्वविद्यालय और कालेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को अब संस्थान की फैकल्टी ही वरिष्ठ छात्रों और परिसर से रूबरू कराएगी। इसके अच्छे परिमाण देखने को मिल रहे है। तीसरा कदम- निष्ठा है जिसके तहत 42 लाख शिक्षकों को अत्याधुनिक ज्ञान, विज्ञान से प्रशिक्षित किया जाएगा। चौथा कदम-स्ट्राइड है। इसके तहत शोध और अनुसंधान पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्कूलों में पानी बचाओ और पौधरोपण के कार्यक्रम भी शुरू किए गए है।
नई शिक्षा नीति को शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, कब तक इसे लागू कर रहे है। कोई समय-सीमा तय की गई है?
जवाब- पहली बार हम कोई ऐसी नीति बनाने जा रहे है, जिसे लेकर दो लाख से ज्यादा सुझाव मिले है। हम सभी सुझावों का अध्ययन कर रहे है। कोशिश है, कि इनमें कोई खामी न रहे है। सुझावों को अंतिम रूप देते ही हम इसे तुरंत ही कैबिनेट के सामने लेकर जाएंगे।
शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए दावे तो किए जा रहे है, लेकिन विश्वविद्यालय से लेकर स्कूलों तक में शिक्षकों की भारी कमी है।
जवाब- सभी राज्यों से हमने खाली पदों को जल्द से जल्द भरने के लिए अनुरोध किया है। इनमें राज्य के विश्वविद्यालय और स्कूल दोनों ही शामिल है। रही बात, केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तो अब वहां भी खाली पदों को भरने का काम शुरू हो गया है।
मंत्रलय ने पांच साल का अपना एक विजन प्लान तैयार किया है। क्या इनमें शिक्षा के बजट को भी जीडीपी का छह फीसद करने का भी लक्ष्य रखा गया है।
जवाब- देखिए, जहां तक बजट का सवाल है। तो इनमें वर्ष 2013-14 के मुकाबले काफी बढ़ोत्तरी हुई है। उस समय यह करीब 65 हजार करोड़ का था, जो अब बढ़कर करीब 95 हजार करोड़ रुपए हो गया है। इसके अलावा हीफा योजना के जरिए उच्च शिक्षण संस्थानों को अलग से मदद देने के लिए एक लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। यदि इसमें हर साल 30 हजार करोड़ मदद दी जाए, तो शिक्षा का कुल बजट एक लाख 25 हजार करोड़ हो जाता है। शिक्षा को आगे बढ़ाने का सरकार का पूरा फोकस है।
मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल तो उठते रहते है, पर स्कूलों में बच्चों को पीने के लिए स्वच्छ पानी न मिलने की एक बड़ी समस्या है। इसे लेकर कोई प्रस्ताव है?
जवाब- हम राज्यों को मिड-डे मील योजना को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए पैसा देते है। निगरानी भी रखते है। शिकायतें मिलने पर कार्रवाई भी करते है। रही बात, स्कूलों में बच्चों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की, जो यह जिम्मा राज्यों का है। उन्हें बेहतर व्यवस्था करने के लिए कहा गया है।
सीबीएसई ने हाल ही में परीक्षा शुल्क में बढ़ोत्तरी की है। साथ ही खुद को घाटे में होना बता रही है?
जवाब- इसे लेकर रिपोर्ट मांगी है। पूछा है, इतनी बढ़ोत्तरी क्यों की गई है। वैसे तो वह एक स्वतंत्र संस्था है, निश्चित ही वित्तीय प्रबंधन के लिए उन्होंने ऐसा फैसला लिया होगा।
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 के हटने के बाद सभी मंत्रलय वहां को लेकर कुछ नई योजनाएं बना रहे है। आप भी कुछ कर रहे है।
जवाब- बिल्कुल, हम राज्य में शिक्षा से जुड़ी गतिविधयों को बढ़ावा देने में जुटे है। श्रीनगर में हम आइआइएम जम्मू का एक कैंपस खोलने का रहे है। जो जल्द ही शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही हम कारगिल में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय भी खोलने जा रहे है। बाकी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की शिक्षा से जुड़ी जो भी जरूरतें होगी, उन्हे पूरा किया जाएगा।
आप खुद भी साहित्यकार है। हिंदी को बढ़ावा देने को लेकर बातें तो खूब होती है, पर कोई मजबूत कदम नहीं उठते नहीं दिख रहे है।
जवाब- देखिए, अनुसूची आठ में जो भी हमारी भाषा है, हम उन्हें मजबूत करना चाहते है। इनमें तमिल, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तेलगू, गुजराती, बंगाली, हिंदी सभी शामिल है। यह सब भारतीय भाषा है, तो भारतीय भाषा बनाम भारतीय भाषा नहीं हो सकता है। भारतीय भाषा बनाम विदेशी भाषा तो हो सकता है। हम अपनी भारतीय भाषाओं को सशक्त करना चाहते हैं। किसी पर हम जबरदस्ती कोई भाषा थोपना भी नहीं चाहते है। जहां तक साहित्यिक की बात है। या ऐसी चीजों को प्रोत्साहित करने का,जो हमारे संस्कारों से जुड़ी है। राष्ट्रीय एकता से जुड़ी है। तो उसे हम पाठ्यक्रम में भी पढ़ाएंगे। हमारे लिए देश पहले है। भारत हमारे लिए पहले है। भारत की एकता के लिए जो-जो सकते है, वह सब करेंगे।
भाषाओं को लेकर राजनीति अब नहीं चलने वाली है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का कहना है कि भारतीय भाषा बनाम विदेशी भाषा की बात तो हो सकती है, पर भारतीय भाषा बनाम भारतीय भाषा नहीं हो सकता। आठवीं अनुसूची में जो भी भारतीय भाषाएं शामिल हैं, हम उन सभी को सशक्त बनाना चाहते हैं। साथ ऐसे साहित्य को बढ़ावा भी देना चाहते है, जो राष्ट्रीय एकता और संस्कृति को मजबूत बनाए। ऐसे विषयों को वह पाठ्यक्रम का भी हिस्सा बनाएंगे।


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