Tuesday, August 13, 2019

शिक्षामित्रों की टूटी आस, दाखिल करेंगे पीआईएल , नई शिक्षा नीति और सरकार पर टिकी निगाह , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट

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सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की दायर क्यूरेटिव याचिका खारिज किए जाने के बाद शिक्षामित्रों की आखिरी आस भी टूट गई है। इसके बावजूद इनका कहना है कि वह हिम्मत नहीं हारे हैं। इसके लिए अब जनहित याचिका दायर करेंगे। .


26 मई 1999 को एक शासनादेश के सहारे शिक्षामित्रों की नियुक्तियां हुईं थीं। 2013 में 1,72,000 शिक्षामित्रों की नियुक्तियां हो गईं। इसे हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मिली। शिक्षामित्रों के समायोजन को निरस्त करने का आदेश पारित हुआ। कई बार शिक्षामित्रों ने समायोजन बहाली की मांग को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन राहत नहीं मिली। छह अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका भी निरस्त कर दी। .


कानपुर से शुरू हुआ था आंदोलन : समायोजन बहाली को लेकर प्रदेश स्तर पर चलने वाले आंदोलन में कानपुर अगुवाकार रहा है। क्यूरेटिव याचिका में भी कानपुर की अहम भूमिका रही। शहर में 2324 शिक्षामित्र हैं। सरकार पर दबाव बनाने के लिए भी कई बार बड़े स्तर पर शहर में आंदोलन हुआ। उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष त्रिभुवन सिंह का कहना है कि क्यूरेटिव याचिका खारिज होने के बाद हमारे पास अब संघर्ष की सीमित राहें ही बची हैं। सरकार शिक्षामित्रों के हित में कोई फैसला लेने के पक्ष में नहीं है। अभी तक डिप्रेशन में कानपुर नगर और देहात समेत कुल 28 शिक्षामित्रों की जान जा चुकी है। ऐसे में जनहित याचिका दायर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। .

समायोजन का सपना फिर टूटा लेकिन ईपीएफओ में मिली सफलता, कई बार खटखटाया कोर्ट का दरवाजा पर नहीं मिली राहत.

आदेश का होगा पालन.

अदालत के आदेश पर जो शिक्षामित्र अपने मूल विद्यालय जाना चाहते थे वह अपने विद्यालयों में तैनात हैं। इनके संदर्भ में शासन स्तर से मिलने वाले सभी आदेशों का पालन किया जाता है। .

-प्रवीण मणि त्रिपाठी, बीएसए.


1. कहां कितने शिक्षामित्र ल्लकानपुर नगर : 2324 ल्लकानपुर देहात : 2223 ल्लफतेहपुर : 2700 ल्लबांदा : 1950 ल्लझांसी : 1653 ल्लहमीरपुर : 935 ल्लललितपुर : 1600 ल्लउन्नाव : 3200 ल्लकन्नौज : 1500 ल्लफर्रुखाबाद : 1735 ल्लमहोबा : 880 ल्लऔरैया : 1400 ल्लचित्रकूट : 1400 ल्लइटावा : 1400 ल्लजालौन : 933

2. मई 1999 को एक शासनादेश के सहारे शिक्षामित्रों की नियुक्तियां हुईं थी, 2013 में 1,72,000 शिक्षामित्रों की नियुक्तियां हुईं थी

3. समायोजन निरस्त होने के बाद इक्का-दुक्का ने ही कानपुर नगर में नौकरी छोड़ी है। उन्होंने राजनीतिक कारणों से इस्तीफा दिया। प्रदेश स्तर पर ऐसे लोगों की संख्या अधिक हो सकती है।



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