Friday, August 30, 2019

68500 शिक्षक भर्ती ::: MRC अभ्यर्थियों को दे वरीयता के जिले में तैनाती , सैकड़ो याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने दिया फैसला , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट

68500 शिक्षक भर्ती ::: MRC अभ्यर्थियों को दे वरीयता के जिले में तैनाती , सैकड़ो याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने दिया फैसला , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट 





इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राथमिक परिषदीय विद्यालयों में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत मेरिट पर सामान्य श्रेणी में चयनित हुए आरक्षित वर्ग (एमआरसी) के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इन अभ्यर्थियों को वरीयता वाले जिले न देकर मनमाने तरीके से तैनाती करने के आदेश को रद्द कर दिया है। अगले सत्र (2020-21) से ऐसे अभ्यर्थियों को उनकी वरीयता वाले जिलोें में तैनाती देने का आदेश दिया है ताकि बच्चों की पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा न आए। कोर्ट ने कहा है कि वर्तमान सत्र में की गई एमआरसी अभ्यर्थियों की तैनाती संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (1) के विपरीत है। इस मामले को लेकर लगभग पौने तीन सौ याचिकाओं के जरिए हजारों अभ्यर्थियों ने तैनाती आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाओं पर न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सुनवाई की।
कोर्ट ने कहा है कि इस आदेश का लाभ एमआरसी (मेरिट में चुने गए आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी) अभ्यर्थियों को ही मिलेगा। इनको आरक्षित श्रेणी में मानते हुए वरीयता वाले जिले में इनकी तैनाती की जाए। कोर्ट ने कहा है कि जो पहले से नियुक्त हो चुके हैं और एमआरसी श्रेणी के हैं, उनके सहित याचीगण तीन माह में अर्जी दें और उसके तीन माह के भीतर सरकार आदेश जारी करे। अगले सत्र से पहले तैनाती कर दी जाए। याचिकाओं पर अधिवक्ता सीमांत सिंह, अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी व अन्य वकीलों ने पक्ष रखा।
याचिकाओं में 31 अगस्त 18 और दो सितंबर 18 की मेरिट लिस्ट को रद्द करने और विज्ञापित 68500 पदों पर पुनरीक्षित चयन सूची जारी करने की मांग की गई थी। याचीगण ने वरीयता वाले जिलों में मेरिट के आधार पर तैनाती की भी मांग की थी। उनका कहना था कि उनसे कम मेरिट वालों को वरीयता वाले जिले दे दिए गए, जबकि उनको अधिक मेरिट पर भी नहीं दिए गए।
परिषद ने की आपत्ति
नौ जनवरी 18 के शासनादेश से सहायक अध्यापकों की भर्ती शुरू की गई। परीक्षा नियामक प्राधिकारी इलाहाबाद ने सामान्य श्रेणी और ओबीसी का कट ऑफ 45 प्रतिशत तथा एससीएसटी का 40 प्रतिशत घोषित किया। बाद में कट ऑफ मेरिट नीचे लाई गई। मेरिट में चयनित आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को उनकी वरीयता के जिलों में नियुक्त नहीं किया गया। परिषद का कहना था कि याचीगण ने बिना कोई आपत्ति किए कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इसलिए अब वे इसे चुनौती नहीं दे सकते। इस भर्ती में 41556 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए है।
एमआरसी अभ्यर्थियों से भेदभाव
शासनादेश के तहत हर श्रेणी के अभ्यर्थियों को उनकी वरीयता के जिले में तैनात किया गया जबकि एमआरसी अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव किया गया है। मेरिट में आगे होने के बावजूद इन्हें वरीयता के जिले नहीं मिले और कम मेरिट वाले आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को वरीयता के जिले आवंटित किए गए।
दो चरणों में हुई नियुक्तियां
चयनित सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां दो चरणों में की गई। पहली में 34660 जबकि दूसरी में 6136 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई। जबकि सभी अभ्यर्थी एक ही चयन प्रक्रिया के तहत चयनित थे। सभी ने ज्वाइन कर लिया। किंतु यह कानून के विपरीत किया गया कोर्ट ने सिर्फ एमआरसी अभ्यर्थियों की तैनाती का आदेश रद्द किया है। उन्हें नए सिरे से तैनाती दी जानी है।



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