Sunday, August 11, 2019

राजकीय विद्यालयों में अध्यापकों के 16,554 पद खाली , एलटी ग्रेड के 10,768 पदों की भर्ती को लेकर हो गया विवाद , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट

राजकीय विद्यालयों में अध्यापकों के 16,554 पद खाली , एलटी ग्रेड के 10,768 पदों की भर्ती को लेकर हो गया विवाद , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट 




सरकारी स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई बेहतर करने के दावे शिक्षकों की कमी के कारण धराशायी होते नजर आ रहे हैं। आलम यह है कि 2019-20 शैक्षिक सत्र में स्कूलों के दोबारा खुले एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है और राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी बरकरार है। प्रदेश के 2,294 राजकीय विद्यालयों में प्रवक्ता के 5,308 और एलटी ग्रेड शिक्षकों के 11,246 कुल 16,554 पद खाली हैं। स्वीकृत पदों की संख्या 26,755 है।.

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के पेपर लीक विवाद में 10,768 पदों पर भर्ती फंस गई है। वहीं प्रवक्ता के 5,308 पदों पर भर्ती के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने आयोग से अनुरोध किया है। .

पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल स्कूल और अभिनव विद्यालय की सबसे खराब स्थिति है। पं. दीन दयाल उपाध्याय स्कूल भाजपा सरकार ने खोले हैं जबकि अभिनव विद्यालय पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार में शुरू किए गए थे।.

एलटी ग्रेड के 478 पदों पर भर्ती को भेजा पत्र:प्रदेश के 697 बालक और 781 बालिका राजकीय विद्यालयों में एलटी ग्रेड के कुल 11,246 पद रिक्त हैं। 10,768 पद विवाद में फंसे है जबकि बचे हुए 478 पदों पर भर्ती के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने लोक सेवा आयोग से अनुरोध किया है। इस संबंध में रिक्त पदों की सूचना भेजी जा चुकी है।.


राजकीय स्कूलों की लगातार उपेक्षा हो रही है। सरकार को चाहिए कि प्रवक्ता के 50 फीसदी रिक्त पद प्रमोशन के जरिए भरे जाएं। अन्य पदों पर भी जल्द नियुक्ति हो जिससे स्कूलों में पठन-पाठन सुचारू हो सके।.

डॉ. रवि भूषण, प्रदेश महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ.

शहर और आसपास के स्कूलों में भर गए शिक्षक.

.

राजकीय स्कूलों के शिक्षकों का तबादला होने के बाद ग्रामीण इलाके के विद्यालयों में शिक्षक नहीं बचे हैं। सरकार ने 20 जून को शिक्षकों का तबादला किया था। इसमें अधिकांश शिक्षक शहर या आसपास के स्कूलों में पहुंच गए। इस कारण ग्रामीण इलाके के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बहुत कम रह गई है। जबकि शहर की अपेक्षा बच्चों की संख्या ग्रामीण इलाके के स्कूलों में अधिक है।.