Friday, July 26, 2019

फर्जीवाड़ा ::: गोरखपुर में एक ही साल में 25 शिक्षक बर्खास्त हुए केस सिर्फ दो पर कराया गया , गोरखपुर-बस्ती मंडल में एक साल में कुल 162 फर्जी शिक्षक दबोचे गए , क्लिक करे और पढ़े पूरी पोस्ट

फर्जीवाड़ा ::: गोरखपुर में एक ही साल में 25 शिक्षक बर्खास्त हुए केस सिर्फ दो पर कराया गया , गोरखपुर-बस्ती मंडल में एक साल में कुल 162 फर्जी शिक्षक दबोचे गए , क्लिक  करे और पढ़े पूरी पोस्ट 





गोरखपुर-बस्ती मंडल में एक साल में 162 फर्जी शिक्षक दबोचे गए। फर्जी प्रमाणपत्रों पर नौकरी दिलाने वाले गिरोह की बेसिक शिक्षा विभाग में जड़ें काफी गहरी हैं। गोरखपुर में ही एक साल में 25 फर्जी शिक्षक पकड़े गये जिनकी बर्खास्ती हुई लेकिन मुकदमा सिर्फ दो पर दर्ज कराया गया। हालांकि उनमें से पांच शिक्षक कोर्ट से स्टे ले आये हैं। इधर, एसटीएफ की जांच में तेजी आने से फर्जी शिक्षकों से लेकर बीएसए दफ्तर के बाबुओं तक हड़कंप मचा है।.

फर्जीवाड़े में कार्रवाई को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग भी कठघरे में है। दूसरे के प्रमाणपत्र, पैनकार्ड का प्रयोग कर नौकरी करने का मामला पकड़े जाने के बाद भी ज्यादातर फर्जी शिक्षकों पर विभाग ने एफआईआर तक नहीं करायी। बर्खास्त हुए 25 शिक्षकों में से सिर्फ दो पर मुकदमा दर्ज कराया गया।.

फर्जी शिक्षकों का मकड़जाल सिर्फ गोरखपुर तक ही सीमित नही है। सिद्धार्थनगर में 56 फर्जी शिक्षक पकड़े गये। महराजगंज में 60, देवरिया में 10 और बस्ती व संतकबीरनगर में चार-चार फर्जी शिक्षक मिले जबकि कुशीनगर में तीन फर्जी शिक्षक शिकायत के बाद पकड़े गये। इन सभी फर्जी शिक्षकों ने वर्षों तक नौकरी करते हुये बेसिक शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये का वेतन उठाया।.

खण्ड शिक्षा अधिकारी की जवाबदेही तय करेंगे : फर्जी प्रमाणपत्र पर नौकरी करने और पकड़े जाने के बाद विभाग द्वारा कागज पर तो कार्रवाई कर दी जाती है लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है।.

बेसिक शिक्षा अधिकारी बर्खास्त शिक्षक पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी को कहते हैं। इसके बाद भी मुकदमा नहीं दर्ज कराय जाता। बीईओ के रुचि नहीं लेने की वजह साठगांठ के साथ ही तबादले के बाद मुकदमे की पैरवी में उपस्थिति होती है। .

बीईओ को दिया कई बार रिमाइंडर.

बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेन्द्र नारायण सिंह ने कहा कि फर्जी शिक्षक पकड़े जाने के बर्खास्तगी के समय ही खण्ड शिक्षा अधिकारी को एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिख दिया जाता है। इन मामलों में एफआईआर नहीं होने पर कई बार खण्ड शिक्षा अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा गया है।.

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बर्खास्तगी के बाद एफआईआर नहीं होना गंभीर मामला है। एफआईआर कराना सम्बंधित खण्ड शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी है। इससे बचा नहीं जा सकता है। खण्ड शिक्षा अधिकारी की जवाबदेही तय होगी। .

सत्य प्रकाश त्रिपाठी, संयुक्त शिक्षा निदेशक.