Sunday, May 12, 2019

बिजली विभाग की टेक्नीशियन भर्ती पर कोर्ट ने फैसला पलटा

बिजली विभाग की टेक्नीशियन भर्ती पर कोर्ट ने फैसला पलटा






हाईकोर्ट ने बिजली विभाग में टेक्नीशियन ग्रेड दो भर्ती का परिणाम रद कर उसमें से गैर मान्यता प्राप्त संस्थाओं का टिपल ‘सी’ प्रमाणपत्र लगाने वाले अभ्यर्थियों को बाहर करने का फैसला खारिज कर दिया है। दो जजों की पीठ ने एकलपीठ के निर्णय को पलटते हुए कहा कि कंप्यूटर की सामान्य जानकारी रखना साक्षरता जैसा मामला है। टिपल ‘सी’ का सर्टिफिकेट कंप्यूटर की सामान्य जानकारी ही देता है।

कोर्ट का कहना था कि विद्युत भर्ती बोर्ड ने पहले ही स्वत: सत्यापित प्रमाणपत्र जमा करने की छूट दी थी जिसे कभी चुनौती नहीं दी गई। दीपक कुमार शर्मा सहित सैंकड़ों अपीलों पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ ने सुनवाई की। उप्र पावर कारपोरेशन ने दो हजार से अधिक पदों पर टेक्नीशियन ग्रेड दो भर्ती का विज्ञापन जारी किया था।

पक्षकारों के व्यक्तिगत अधिकार तय करने के लिए नहीं कोर्ट की शक्तियां : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुच्छेद 226 से संविधान ने हाईकोर्ट को असामान्य शक्ति दी है, इसका इस्तेमाल पक्षकारों के व्यक्तिगत अधिकारों को तय करने के लिए नहीं किया जा सकता। 

कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में 936 सीसीटीवी कैमरे सहित लखनऊ में आग से हुई छति की भरपाई करते हुए भुगतान का समादेश जारी करने के मामले में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया और कहा कि याची सिविल वाद दायर कर सकता है और याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति पीके जायसवाल तथा न्यायमूर्ति डॉ वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मेसर्स आइपी जैकेट टेक्नालॉजी इंडिया प्रालि कंपनी की याचिका पर दिया है।

विधि संवाददाता, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने एक अहम आदेश में कहा है कि सरकारी कर्मचारी के खिलाफ न्यायिक या विभागीय प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान वह ग्रेच्युटी पाने का हकदार नहीं है। इस प्रश्न को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की ही दो खंडपीठों के फैसलों में मतभिन्नता थी, जिसकी वजह से एकल न्यायपीठ ने इस मामले में दाखिल कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए प्रकरण तीन जजों की पूर्णपीठ को संदर्भित कर दिया। 

शिव गोपाल व अन्य कई याचिकाओं पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल, न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की। याचीगण के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया लंबित रहने के कारण रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी रोक दी गई थी, इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं। एकल न्यायपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान पता चला कि ऐसे मामलों में ग्रेच्युटी के भुगतान को लेकर दो खंडपीठों के अलग-अलग निर्णय हैं।

 जय प्रकाश केस और फेनी सिंह केस में ग्रेच्युटी नहीं दिए जाने और ग्रेच्युटी दिए जाने को लेकर निर्णय दिए गए हैं। इसके मद्देनजर एकलपीठ ने मामला पूर्णपीठ को सुनवाई के लिए संदर्भित कर दिया। पूर्णपीठ ने इस विधिक प्रश्न पर विचार करते हुए कहा कि मामले में यूपी सिविल सर्विसेज (दसवां संशोधन) का रेग्युलेशन 919 (ए) महत्वपूर्ण है। रेग्युलेशन के मुताबिक सरकारी कर्मचारी के खिलाफ न्यायिक या विभागीय प्रक्रिया या प्रशासनिक अधिकरण के समक्ष किसी जांच के लंबित रहते उसे डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी नहीं दी जा सकती है।
प्रकरण लंबित तो सरकारीकर्मी ग्रेच्युटी पाने के हकदार नहीं