Tuesday, May 14, 2019

मेरिट के आधार पर नहीं हो सरकारी पदों पर भर्तियां

मेरिट के आधार पर नहीं हो सरकारी पदों पर भर्तियां


विद्यार्थियों का मौलिक ज्ञान आज अंकों की होड़ में खत्म होता जा रहा है। इस होड़ में अनैतिक संसाधन खूब इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इससे मेधावी छात्र पीछे रह जाते हैं, जबकि नकल करने वाले आगे निकल रहे हैं। नकल व्यवस्था के फलने-फूलने में विद्यार्थियों से ज्यादा अभिभावकों की भूमिका है। सो, अंकों के होड़ को खत्म करने के लिए सरकारी पदों पर होने वाली भर्तियों में अंकों की मेरिट को समाप्त करना होगा। यह बातें सोमवार को ‘दैनिक जागरण’ की अकादमिक बैठक में जीआइसी के प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार सिंह ने कहीं।

‘कैसे बचे स्कूली परीक्षाओं में अंकों की होड़ से’ विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि गलत तरीके से अधिक अंक लेकर बहुत से लोग नौकरी पा गए है। जबकि किसी कारणवश कम अंक पाए मेधावी छात्र अवसादग्रस्त हो रहे हैं। सीबीएसई बोर्ड ने अंकों की होड़ की व्यवस्था इसलिए लागू की, क्योंकि उनके यहां बच्चों की संख्या कम होती है। लेकिन अब यूपी बोर्ड भी उसी का अनुसरण कर रहा है।

उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं में प्रदेश स्तरीय मेरिट को खत्म करके विद्यालय स्तर पर मेरिट व्यवस्था लागू करने की वकालत की। माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा के स्तर में कैसे सुधार हो, के सवाल पर कहा कि जब तक शिक्षक क्लास और छात्र से नहीं जुड़ेगा, तब तक शिक्षा में सुधार नहीं होगा। यह शिक्षकों के हृदय परिवर्तन से ही संभव है।
’>>शिक्षक क्लास और छात्र से जुड़ेगा, तभी शिक्षा में होगा सुधार
’>>‘कैसे बचे स्कूली परीक्षाओं में अंकों की होड़ से’ विषय पर बोले विशेषज्ञ
देवेंद्र कुमार सिंह जीआइसी के प्रधानाचार्य हैं। वह मूलरूप से कौशांबी जिले के कनैली गांव के रहने वाले हैं।

इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई उन्होंने कनैली में की। फिर परास्नातक तक की पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय और बीएड कानपुर विश्वविद्यालय के हलीम मुस्लिम कॉलेज से की। 1991 में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जीआइसी में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता के रूप में पहली पोस्टिंग हुई। 1997 में प्रॉविंशियल एजूकेशन सर्विसेज (पीईएस) में चयन हुआ। 

वह महोबा, ललितपुर में बेसिक शिक्षा अधिकारी, मैनपुरी, इटावा और इलाहाबाद (अब प्रयागराज) डायट में प्राचार्य रहे। डीआइओएस देवरिया और सहायक उप शिक्षा निदेशक भी रहे। 2007 से जीआइसी में प्रधानाचार्य हैं। इन्होंने छह से 12 तक अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं, गृह परीक्षाओं में बच्चों को ओएमआर सीट भरवाने की सुविधा मुहैया कराई। सीसीटीवी कैमरे, वाई-फाई, योग की कक्षाएं चलवाने के साथ बोर्ड परीक्षा के पहले अतिरिक्त कक्षाएं और कमजोर छात्रों के लिए उपचारात्मक कक्षाएं भी शुरू कराई।

बैठक को संबोधित करते देवेंद्र कुमार सिंह।
विद्यालयों को सुधारने में प्रधानाचार्यो की भूमिका अहम
उन्होंने कहा कि विद्यालयों को सुधारने में प्रधानाचार्यो की अहम भूमिका होती है। अगर प्रधानाचार्य चाहे तो विद्यालय की सभी व्यवस्था सुधर सकती है। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा में विद्यार्थियों के 100-100 अंक पाने के सवाल पर कहा कि शुरू से ही उन्हें बेहतर माहौल मिलता है। सीबीएसई बोर्ड के विद्यालय लोगों के लिए स्टैंडर्ड बन गया है। इसलिए बच्चे उधर भाग रहे हैं।