Wednesday, April 17, 2019

CCSU मेरठ :: कोर्स की अवधि पूरी , फिर भी ऑनलाइन भरे जा रहे फॉर्म , 21 अप्रैल तक भरे जाने है सेमेस्टर परीक्षा के लिए फॉर्म , छात्र जा सकते है कोर्ट , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

CCSU मेरठ :: कोर्स की अवधि पूरी , फिर भी ऑनलाइन भरे जा रहे फॉर्म , 21 अप्रैल तक भरे जाने है सेमेस्टर परीक्षा के लिए फॉर्म ,  छात्र जा सकते है कोर्ट , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर  



सीसीएसयू से संबद्ध कॉलेजों में भरे जा रहे सेमेस्टर परीक्षा फार्म में भारी गड़बड़ी सामने आ रही है। इसमें ऐसे छात्र-छात्राओं के परीक्षा फार्म भी भरे जा रहे हैं जिनके पाठ्यक्रम की अवधि काफी पहले पूरी हो चुकी है। नियमानुसार ये छात्र परीक्षा फार्म नहीं भर सकते हैं, लेकिन इसके बाद भी ऐसा हो रहा है। इन छात्रों के फार्म कॉलेजों से वापस हो रहे हैं। छात्रों ने इसकी शिकायत प्रति कुलपति से की है।
सीसीएसयू से संबद्ध कॉलेजों में तीन साल की डिग्री को छह साल में पूरा किया जा सकता है। पांच वर्षीय जो पाठ्यक्रम चल रहे हैं उनको पूरा करने के लिए आठ साल मिलते हैं। अगर तीन साल की डिग्री छह साल में पूरी नहीं हो पाती है तो विश्वविद्यालय से उसको पांच हजार रुपये फीस जमा करने पर एक मौका और दिया जा सकता है। ऐसा ही पांच वर्षीय पाठ्यक्रम में है। अगर आठ साल पूरे हो गए हैं तो एक साल विश्वविद्यालय और दे सकता है। इसमें भी पांच हजार रुपये अतिरिक्त फीस जमा करनी होगी। लेकिन जो सेमेस्टर फार्म भरे जा रहे हैं उनमें चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है।
बुधवार को ऐसे कई छात्र विश्वविद्यालय पहुंचे जिनके एलएलबी के कोर्स को दस साल हो चुके हैं, लेकिन उनके पेपर क्लियर नहीं है। इन छात्रों के नियमानुसार फार्म नहीं भरे जा सकते हैं। लेकिन इन सभी के फार्म भी भरे जा रहे हैं। वह भी बिना पांच हजार रुपये फीस का भुगतान किए। इन छात्रों की डिग्री की समय सीमा खत्म होने के कारण कॉलेजों ने फार्म भरने से इंकार किया तो ये छात्र विश्वविद्यालय पहुंच गए। छात्रों ने प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला और रजिस्ट्रार से मुलाकात की। छात्रों का कहना है कि जब उनके फार्म भर गए हैं तो फिर उनको पेपर में बैठने से क्यों रोका जा रहा है। वह इस मामले में कोर्ट की भी शरण ले सकते हैं।
ऐसे कैसे भरे जा रहे फार्म
जिस तरह से इन छात्रों के फार्म डिग्री की अवधि पूरी होने पर भी भरे गए हैं, उससे सवाल खड़े हो रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि दूसरे भी ऐसे फार्म खुल रहे हों जिन्हें भरा नहीं जा सकता है। ऐसा हुआ तो कंपनी की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन मुसीबत मेें फंस सकता है। प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला ने इस मामले में कंपनी से ऐसे फार्मों की जानकारी मांगी है।