Thursday, April 11, 2019

सीबीएसई :: इंटरमीडिएट तक कला शिक्षा हुई लागू , इसी सत्र से प्रति सप्ताह दो पीरियड आरक्षित करने होंगे , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

सीबीएसई :: इंटरमीडिएट तक कला शिक्षा हुई लागू , इसी सत्र से प्रति सप्ताह दो पीरियड आरक्षित करने होंगे , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 1 से 12वीं तक कला की शिक्षा को अनिवार्य करने के लिए कहा है। इसके लिए निर्देश भी जारी किए हैं। बोर्ड ने शिक्षा में कला के महत्व को समझते हुए निर्णय लिया है। .

बोर्ड ने इसके लिए कई स्कूलों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों एनसीईआरटी सहित अन्य लोगों से संपर्क किया है। बोर्ड का मानना है शिक्षा में कला को समाहित करने से शिक्षण को और रुचिकर और बेहतर बनाया जा सकता है। बोर्ड ने कहा कि सीबीएसई ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों को 2019-20 के शैक्षणिक सत्र से इसे लागू करने का निर्देश दिया है। .

बोर्ड का कहना है कि आर्ट एजुकेशन को कक्षा 1 से 12 तक के लिए अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। हर स्कूल इसे लागू करना सुनिश्चित करे। बोर्ड ने कहा है कि अगर संभव हो सके तो कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को इसके बारे में बताने के अलावा पाक कला से परिचित कराया जाए, ताकि वे पौष्टिक भोजन के महत्व को समझें। उन्हें भारत में उगाई जाने वाली फसलों और मसालों के बारे में भी बताएं। विभिन्न बीजों से तेल कैसे निकाला जाता है, अच्छी कृषि पद्धतियों के बारे में, कीटनाशक उपयोग आदि के बारे में भी जानकारी दें। बोर्ड ने कहा है कि इसके माध्यम से छात्र विभिन्न राज्यों के पारंपरिक खाद्य पदार्थों को सूचीबद्ध कर सकेंगे और विविधता से पूर्ण संस्कृति से परिचित हो सकेंगे। बोर्ड ने कहा कि खाना बनाने की कक्षाओं में छात्र और छात्रा दोनों को शामिल किया जाए। बोर्ड का कहना है कि सभी स्कूलों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे कला को शिक्षा पद्धति में एकीकृत करने के लिए ठोस प्रयास करेंगे। बोर्ड विस्तृत जानकारी जल्द स्कूलों को भेजेगा।.

बोर्ड ने कहा है कि प्रत्येक स्कूल कला शिक्षा के लिए अनिवार्य रूप से प्रति सप्ताह, कक्षा में न्यूनतम दो कक्षाएं संचालित करेगा। यह दृश्य और श्रव्य दोनों माध्यमों में दिया जा सकता है। इसमें चार विधाओं को शामिल किया जा सकता है जैसे संगीत, नृत्य, विजुअल आर्ट और रंगमंच। इसे सिखाने के अलावा भागीदारी, संवाद और अनुभव परकता पर जोर होना चाहिए। .