Thursday, April 18, 2019

यूपी पुलिस सिपाही भर्ती की चल रही मेडिकल प्रक्रिया में पकडे गए घोटाले में सीएमओ कार्यालय में तैनात है सेंधमारी का मास्टरमाइंड , ज्यादातर समय सीएमओ कार्यालय में रहता था ओंकार , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

यूपी पुलिस सिपाही भर्ती की  चल रही मेडिकल  प्रक्रिया में पकडे गए घोटाले में सीएमओ कार्यालय में तैनात है सेंधमारी का मास्टरमाइंड , ज्यादातर समय सीएमओ कार्यालय में रहता था ओंकार , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 




पुलिस भर्ती में सेंधमारी का प्रयास करने वाले असली मास्टरमाइंड सीएमओ कार्यालय में हैं। पुलिस और क्राइम ब्रांच ने जिस पीडब्लूडी कर्मी को मंगलवार को गिरफ्तार किया, वो तो बस मोहरा मात्र है। .

ज्यादातर समय सीएमओ कार्यालय में रहता था ओंकार
उसका इस्तेमाल अभ्यर्थियों से पैसा उठाने के लिए किया जाता था और इस काम के लिए हिस्सा दिया जाता था। असली मास्टरमाइंड एक फिजिशियन और सीएमओ कार्यालय का बाबू है। इनके नाम पुलिस ने विवेचना में शामिल किए हैं और जांच शुरू कर दी गई है।.

मेरठ पुलिस लाइन में यूपी पुलिस दरोगा और सिपाही की भर्ती परीक्षा चल रही है। यहां शारीरिक माप-तौल और दस्तावेज की जांच की जा रही है। डॉक्टरी जांच के लिए सात-सात एक्सपर्ट और डॉक्टरों की दो टीमों को गठन किया गया है। 1098 पुलिसकर्मियों का यहां मेरठ में ही मेडिकल परीक्षण व अन्य प्रक्रिया पूरी होनी हैं। इसी भर्ती प्रक्रिया के दौरान परतापुर निवासी लवी मंगलवार को मापतौल के लिए आया था। .

मापतौल के दौरान भर्ती प्रक्रिया के लिए गठित पैनल में शामिल फिजिशियन मनीष ने लवी को बताया कि उसकी मापतौल पूरी नहीं हो पा रही है और रिजेक्ट हो जाएगा। इसी बात का डर दिखाकर कहा कि कुछ पैसा खर्च करे तो पास करा देंगे। .

लवी का नंबर ले लिया और बताया कि कुछ देर बाद कॉल आएगा। इसके बाद लवी को बाहर भेज दिया। लवी के मोबाइल पर कुछ देर बाद एक कॉल आई। फोन करने वाले ने 15 हजार रुपये की डिमांड की। लवी ने एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी से शिकायत कर दी, जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने रुपये मांगने वाले आरोपी को दबोच लिया। आरोपी की पहचान ओंकार निवासी 1/2 न्यू तहसील जली कोठी, थाना देहली गेट के रूप में हुई। आरोपी पीडब्लूडी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। सिविल लाइन थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। उसका मोबाइल भी जब्त कर लिया गया। .

आरोपी ने पूछताछ में बताया कि सीएमओ कार्यालय में तैनात बाबू राजहंस और फिजिशियन मनीष से संपर्क है। मनीष भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों ने नंबर लेकर सीएमओ कार्यालय में तैनात बाबू राजहंस को व्हाट्सएप पर भेजता है। इसके बाद राजहंस इस नंबर को ओंकार को भेजता था। ओंकार को बताया जाता था कि दिए गए नंबर पर कॉल करके पैसा उठा लाओ। इसकी एवज में दो से तीन हजार रुपये ओंकार को मिलते थे। .

पुलिस भर्ती में सेंधमारी के प्रयास की वारदात के बाद पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर भर्ती की जगह बदल दी गई है। पहले पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता हॉल के सामने कमरों में ये प्रक्रिया चल रही थी। मंगलवार की घटना और ओंकार की धरपकड़ के बाद अब इस प्रक्रिया को पुलिस लाइन के अंदर पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया, साथ ही गेट पर दो पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति वहां तक न पहुंच सके। बाहर भी सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात हैं।.

पीडब्लूडी कर्मी ओंकार। .

एसपी ट्रैफिक और पुलिस भर्ती के नोडल संजीव वाजपेयी को इस मामले में दो दिन से शक हो रहा था। इसलिए उन्होंने गिरोह को पकड़ने के लिए अपने ही ट्रैफिक विभाग के पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में भर्ती की जगह के आसपास ही छोड़ा हुआ था। इस दौरान ही लवी ने अपने एक परिचित सिपाही से पैसा मांगा था। तभी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने शिकायत करने की बात कही और इसके बाद गैंग का सदस्य धरा गया। .

ओंकार की गिरफ्तारी के बाद कई लोग हैरान हैं। ओंकार पीडब्लूडी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है, लेकिन वो ज्यादातर समय वहीं सीएमओ कार्यालय में रहता था। कई डॉक्टरों ने बताया कि वो तो ओंकार को सीएमओ कार्यालय का कर्मचारी ही समझते थे। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद सारा भेद खुल गया।.