Tuesday, April 9, 2019

63 हजार पदों के लिए रेलवे में सहायक लोको पायलेट के अभ्यर्थी आंखों की जांच को परेशान , अस्पतालो के लगाए चक्कर मिली निराशा , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

63 हजार पदों के लिए रेलवे में सहायक लोको पायलेट के अभ्यर्थी आंखों की जांच को  परेशान  , अस्पतालो  के लगाए चक्कर मिली निराशा , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 




63 हजार पदों के लिए रेलवे में सहायक लोको पायलेट के अभ्यर्थियों के आंखों की जांच नहीं हो पा रही है। सोमवार को विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थियों ने किंग जार्ज चिकित्सा विविद्यालय (केजीएमयू), बलरामपुर और लोहिया अस्पताल में आंखों की जांच करायी लेकिन उनके फिटनेट फार्म पर कोई भी डाक्टर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं हुआ। यह मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के प्रवक्ता के पास भी पहुंचा लेकिन कोई हाल नहीं निकला। कई अस्पतालों से निराश होकर दर्जनों की संख्या में अभ्यर्थी बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डा. राजीव लोचन के कार्यालय पहुंच गए। अभ्यर्थी पूरन लाल ने बताया कि नेत्र परीक्षण तीन प्रकार का होना है, इसमें बिनओकुलर विजन, फील्ड विजन और नाइट विजन का टेस्ट होना है। फार्म जमा करने की अंतिम तारीख 16 अप्रैल है। अभ्यर्थी बताते हैं कि जब लोहिया अस्पताल पहुंचे तो वह जांच न होने की बात कहकर लौटा दिया गया। इसके किंग जार्ज चिकित्सा विविद्यालय में तीनों हो गयी लेकिन जब डाक्टर से फार्म पर हस्ताक्षर करने की बात कही गयी तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिये और जिला अस्पताल बलरामपुर से प्रमाणित करने की बात कही। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डा. राजीव लोचन ने अभ्यर्थियों की समस्या सुनी और मोबाइल से अपने वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने के बाद अभ्यर्थियों की समस्या दूर करने से मना कर दिया। इसके बाद अभ्यर्थी व्यवस्था को कोसते हुए लौट गए। अधिकारिक सूत्रों की माने तो एक तीनों प्रकार के विजन टेस्ट की सुविधा राजधानी के कई प्रमुख सरकारी अस्पताल में मौजूद नहीं है। इसके अलावा बिना कोई नोडल अधिकारी या विभाग के आदेश होने पर ही डाक्टर नेत्र परीक्षण रिपोर्ट को प्रमाणित करेंगे। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था के चलते अभ्यर्थियों के फार्म प्रमाणित नहीं किये जा रहे हैं।