Monday, April 8, 2019

रेलवे ग्रुप डी भर्ती :: युवतियों ने उठायी बोरी, गर्मी में एक किमी दौड़ाया। पढ़ने में अव्वल कई लड़िकयां एक किमी की दौड़ 5 मिनट 40 सेकेंड में पूरी न कर पाने पर हुई फेल , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

रेलवे ग्रुप डी भर्ती :: युवतियों ने उठायी बोरी, गर्मी में एक किमी दौड़ाया।  पढ़ने में अव्वल कई लड़िकयां एक किमी की दौड़ 5 मिनट 40 सेकेंड में पूरी न कर पाने पर हुई फेल , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 




रेलवे में ग्रुप डी पदों की भर्ती के लिए डीएसए ग्राउंड पर चल रही शारीरिक दक्षता परीक्षा में रविवार को महिला अभ्यर्थी जुटीं। नौकरी के अभाव में एमएससी एमए-बीए पास युवतियां भी कड़ी धूप में 20 किलो रेत की बोरी लेकर दौड़ीं। रेलवे ने नियम बदल कर 400 मीटर के स्थान पर लड़कियों को भी एक किमी की दौड़ लगवायी। पढ़ने में अव्वल कई लड़िकयां एक किमी की दौड़ 5 मिनट 40 सेकेंड में पूरी न कर पाने पर फेल हो गयीं।.

रेलवे की इस सबसे छोटी नौकरी के लिए पुरुष व महिला अभ्यर्थी के लिए नियम अलग है। पुरुष 35 किलो का वजन लेकर दौड़ते हैं तो लड़कियां 20 किलो लेकिन दौड़ में एक किलोमीटर की दूरी सिर्फ पुरुषों के लिए होती है। पहले लड़कियों को सिर्फ 400 मीटर की दौड़ लगानी होती थी। संस्कृत से एमए कर चुकीं मेरठ की अंतिम रविवार को रेत की बोरी कंधे पर लेकर दौड़ीं। एक किमी की दौड़ उन्होंने निर्धारित समय में पूरी की। बोली, नौकरी के लिए इंतजार करते करते काफी वक्त बीत चुका। निराश होकर ग्रुप डी के लिए अर्जी लगायी थी। बुंदेलखंड विवि से अर्थशास्त्र में एमए करने वाली झांसी की नीता बैंक की कई परीक्षाएं दे चुकी हैं। वह कहती हैं कि नौकरी नहीं मिली तो रेलवे की छोटी नौकरी के लिए तैयार हो गई। वाराणसी की दीपिका प्रजापति एमएससी और बीएड हैं। एलटी ग्रेड 2018 की परीक्षा दे चुकी हैं लेकिन रिजल्ट नहीं आया। शिक्षक भर्ती के लिए भी आवेदन किया था लेकिन मामला कोर्ट में जाने से नौकरी से वंचित हैं। बोझ उठाकर दौड़ने के लिए वह तीन साल की बेटी विदुषी और पति के साथ आईं। आरा से आईं राजलक्ष्मी ने रसायन विज्ञान में पीजी किया है। बोलीं कि भर्तियां निकलने के इंतजार में उम्र बढ़ती जा रही है। ऐसे में ग्रुप डी की नौकरी के लिए तैयार हो गई। पर महज 10 सेकेंड से एक किमी की दौड़ पूरी कर पाने में चूक गईं। उनकी तरह कई और महिलाएं एक किमी की दौड़ निर्धारित समय में पूरी कर पाने में नाकाम रहीं। इन लोगों का कहना था कि पिछली बार महिलाओं के लिए 400 मी की दौड़ रखी गई थी। इस बार दौड़ पुरुषों के बराबर रखने से परेशानी हुई। .