Sunday, March 17, 2019

यूपी पुलिस 41520 सिपाही भर्ती में नया केस , कॉमन कट ऑफ के बाद श्रेणीवार दिया आरक्षण , हॉरिजॉन्टल आरक्षण गलत तरीके से लागू करने पर जवाब तलब , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

यूपी पुलिस 41520 सिपाही भर्ती में नया केस , कॉमन कट ऑफ के बाद श्रेणीवार दिया आरक्षण , हॉरिजॉन्टल आरक्षण गलत तरीके से लागू करने पर जवाब तलब , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 


पुलिस और पीएसी के 41520 सिपाहियों की भर्ती के लिए 14 नवंबर 2018 को जारी विज्ञापन पर नियुक्ति के दौरान क्षैतिज आरक्षण गलत तरीके से लागू करने का आरोप है। इसे लेकर ओबीसी वर्ग के कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट मेें याचिका दाखिल की है। कहा गया है कि विज्ञापन में यह नहीं बताया गया है कि क्षैतिज आरक्षण किस प्रकार से लागू किया जाएगा। पुलिस भर्ती बोर्ड ने कॉमन कट ऑफ मेरिट पर चयन किया और बाद में आरक्षण श्रेणीवार लागू कर दिया गया। इसका नतीजा यह रहा कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी अपनी श्रेणी में चयनित हो गए और अधिक अंक पाने वाले चयन से बाहर हो गए। राजू यादव और 11 अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने पुलिस भर्ती बोर्ड और राज्य सरकार से 25 मार्च तक इस मामले में जवाब तलब किया है। याचीगण के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि 41520 पदों में से पांच प्रतिशत पद एक्स सर्विस मैन और सेनानी आश्रितों के लिए आरक्षित था। यह आरक्षण क्षैतिज आधार पर होना था।

याचीगण को चार दिसंबर 2018 को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया। सभी वर्गों के लिए कॉमन कट ऑफ 67.43382 तय किया गया। याचीगण शारीरिक दक्षता में सफल हुए। इसी बीच भर्ती बोर्ड ने कट ऑफ मेरिट गिराते हुए 60 प्रतिशत कर दी। अंतिम चयन परिणाम 18 फरवरी 2019 को घोषित किया गया।

इसमें आरक्षण श्रेणीवार कर दिया गया जिससे याचीगण चयन से बाहर हो गए जबकि उनसे कम अंक पाने अभ्यर्थी अपनी श्रेणियों में चयन पा गए। अधिवक्ता का कहना था कि अनिल कुमार गुप्ता केस में सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि क्षैतिज आरक्षण कितने पदों पर और किस प्रकार से लागू किया जाएगा इसे विज्ञापन में ही बताना होगा जबकि विज्ञापन में ऐसा कुछ नहीं बताया गया। बोर्ड की गलती से याचीगण चयन से बाहर हुए हैं। कोर्ट ने भर्ती बोर्ड से 25 मार्च तक जानकारी मांगी है।