Thursday, November 8, 2018

यूपी पुलिस के सिपाहियों को जल्द मिल सकती है अच्छी खबर , सिपाहियों को गृह जनपद के पड़ोसी जिले में तैनाती का तोहफा दे सकती है सरकार , समिति गठित कर प्रदेश सरकार ने मांगी है रिपोर्ट, समीक्षा के बाद सरकार ले सकती है फैसला , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

यूपी पुलिस के सिपाहियों को जल्द मिल सकती है अच्छी खबर , सिपाहियों को गृह जनपद के पड़ोसी जिले में तैनाती का तोहफा दे सकती है सरकार , समिति गठित कर प्रदेश सरकार ने मांगी है रिपोर्ट, समीक्षा के बाद सरकार ले सकती है फैसला , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 




लोक सभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार सिपाहियों को गृह जनपद के पड़ोसी जिले में तैनाती का तोहफा दे सकती है। इसके लिए शासन ने जोन स्तर पर एडीजी और रेंज स्तर पर आईजी के नेतृत्व में समिति गठित कर गृह जनपद की सीमा से लगने वाले जिले में सिपाहियों की तैनाती न करने के पूर्व के आदेश की समीक्षा करने का आदेश दिया है। रिपोर्ट के आधार पर सरकार बार्डर स्कीम पर निर्णय लेगी। सप्ताह भर पहले इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। .

सरकार के फैसले के आधार पर डीजीपी ने जोन और रेंज स्तर पर इसके लिए समिति गठित की है। समिति के सभी सदस्य बार्डर स्कीम पर रिपोर्ट तैयार करेंगे। सदस्यों की रिपोर्ट पर जोन स्तर पर एडीजी और रेंज स्तर पर आईजी ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है। आईजी मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में टीम गठित कर इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। एडीजी जोन की टीम ने कार्रवाई और प्रगति पर अपना सुझाव दिया है। एसपी कौशाम्बी प्रदीप गुप्ता से भी फीडबैक लिया गया है। .

क्यों लागू हुई थी बार्डर स्कीम: मंझनपुर। पहली बार बसपा सरकार और दूसरी बार सपा सरकार ने बार्डर स्कीम लागू करते समय तर्क दिया था कि गृह जनपद से सटे जिले में तैनात रहने पर सिपाही स्थानीय राजनीति में सक्रिय हो जाते हैं। इससे विभागीय कामकाज के साथ ही कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण का काम प्रभावित होता है। थाने और चौकियों में तैनाती के लिए अधिकारियों पर राजनीति दबाव बनाने की भी बात कही गई थी। इसके साथ ही सीमावर्ती जिले में रहने की वजह से अपराधियों से सांठ-गांठ रखने का तर्क भी दिया गया था। इसी को आधार बनाकर गृह जनपद से सटे जिले में उनकी तैनाती पर रोक लगा दी गई थी। .

बार्डर स्कीम की समीक्षा के लिए रेंज स्तर पर गठित समिति की अध्यक्षता आईजी करेंगे। रेंज मुख्यालय का एसएसपी समिति के सचिव होंगे। कौशाम्बी के एसपी प्रदीप गुप्ता समेत रेंज के सभी जिले में से कहीं भी कार्यरत एक सीओ, दो इंस्पेक्टर, दो दीवान और दो सिपाही समिति के सदस्य होंगे। सभी अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। जोन स्तर पर एडीजी की अध्यक्षता में गठित होने वाली समिति में आईजी भी शामिल होंगे। .

पहले गृह जनपद की सीमा से लगने वाले जिलों में सिपाहियों की तैनाती पर कोई रोक नहीं थी। वर्ष 2010 में पूर्व की बसपा सरकार ने एक आदेश जारी कर गृह जनपद की सीमा से लगने वाले जिले में सिपाहियों की तैनाती पर रोक लगा दी। बाद में वर्ष 2012 में बनी सपा सरकार ने नया आदेश जारी कर पूर्ववर्ती सरकार के बार्डर स्कीम को निरस्त कर दिया था। .


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